प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा मातृभाषा में ही होनी चाहिए- डॉ मोहन भागवत

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” मातृभाषा के लिए अपनी शक्ति में जितना हो सके उतना प्रयास करना चाहिए। प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा मातृभाषा में ही होनी चाहिए। दुनिया में फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।वो हर प्रवासी बच्चे को भी उसकी मातृभाषा में शिक्षा देते हैं।” डॉ मोहन भागवत जी ने यह बात केशवकुटी में आयोजित कार्यकर्ता परिवार कार्यक्रम में कही। उनसे एक बालिका ने प्रश्न पूछा कि संघ में भाषण के बाद ताली क्यों नहीं बजती? इस पर श्री भागवत ने कहा कि “ताली नहीं बजती क्योंकि संघ एक कुटुंब है। घर में हमारे बड़े कोई महत्वपूर्ण बात कहते हैं तो हम ताली नहीं बजाते, बल्कि उस पर चिंतन करते हैं।”


इसके पूर्व समन्वय सेवा केंद्र में आयोजित बैठक में विद्यार्थी स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने शाखा कार्य की बारीकियों की चर्चा की और प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने कहा कि हम शाखा में जो सीखते हैं वो हमारे जीवन में उतरना चाहिए। शाखा आने वाले स्वयंसेवक में सद्गुणों का विकास होना चाहिए।
एक स्वयंसेवक के प्रश्न कि, देश के विकास के लिए संघ की क्या सोच है, श्री भागवत ने बताया कि “अपनी शाखा जिस बस्ती में लगती है, उस बस्ती के लिए कोई सकारात्मक कार्य स्वयंसेवकों को करना चाहिए। जल जंगल जमीन को अच्छा रखने का काम मनुष्य ही कर सकता है। इसलिए हमें अच्छे मनुष्य का निर्माण करना है। यही सबसे बड़ा काम है। इसी के लिए शाखा है। इसी के लिए संघ है।”इस अवसर पर क्षेत्र संघचालक अशोक जी सोहनी, प्रांत संघचालक प्रशांत सिंह, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार, अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख सुनील कुलकर्णी, क्षेत्र प्रचारक दीपक जी, अन्य केंद्र , क्षेत्र, प्रांत, विभाग के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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