26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाया था। युद्ध में बलिदान देने वाले देश के वीर सपूतों की स्मृति में प्रति वर्ष कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

अक्टूबर 1998 में पाकिस्तान के मुशर्रफ ने कारगिल प्लान को स्वीकृति दी थी । भारत के उत्तर में जम्मू और कश्मीर के कारगिल-द्रास सेक्टर में स्थित तोलोइंग्ल्स की तलहटी में मई से जुलाई 1999 को तीन महीने भारत और पाकिस्तान के बीच यह युद्ध लड़ा गया था।

पाकिस्तानी सैनिकों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के साथ कुछ क्षेत्रों पर अवैध रूप से आक्रमण किया था।इसमें शत्रु देश के सैनिकों ने नियंत्रण रेखा के माध्यम से भारत देश में घुसपैठ करने का षडयंत्र किया था।

इस तीन माह के युद्ध में भारत के लगभग 527 सैनिकों ने आपने जीवन का बलिदान दिया और लगभग 1300 सैनिक घायल हुए थे। ये सभी सैनिक 30 से भी कम आयु के थे ।

भारत माता के सच्चे सपूतों ने पाकिस्तानी नापाक इरादों को परास्त करके पुनः सिद्ध कर दिया कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। इस अवसर पर कुछ पंक्तियाँ स्मृति पटल पर अंकित हो रही है-:
दूध माँगोगे, खीर देंगे ।
कश्मीर माँगोगे ,चीर देंगे।।

आज 26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी घुसपैठियों पर भारत की विजय की 23वीं वर्षगाँठ है।हम सभी देशवासी एक स्वर में कारगिल युद्ध में विजय दिलाने वाले सभी साहसी वीर सपूतों को कोटि कोटि नमन करते हैं।

– डॉ नुपूर निखिल देशकर

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