युवा पीढ़ी में संस्कारों का बीजारोपण करना हमारी जिम्मेदारी-साध्वी ऋतम्भरा…

जब-जब धर्म व देश का विषय आता है तब-तब भारत की मातृशक्ति सदैव अग्रणी भूमिका में नजर आती है श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में तरूणियों व युवतियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया,उसी का परिणाम है कि हम सब राष्ट्रवासी मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण होते देखेेंगे।

उक्त विचार श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण निधि संग्रह सम्पर्क महाअभियान के अंतर्गत स्थानीय ऑडिटोरियम में वात्सल्य मूर्ति साध्वी ऋतम्भरा जी (दीदी माँ) ने मातृशक्ति सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए तथा उन्होंने राम मंदिर निर्माण निधि समर्पण में मातृशक्ति के सहयोग का आव्हान किया।

महासंपर्क अभियान के प्रचार-प्रसार प्रमुख दिलीप सेन ने बताया कि श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अलग-अलग आयामों की बैठकें व सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं उसी क्रम मातृशक्ति सम्मेलन को सम्बोधित करने के लिए राष्ट्रीय संत साध्वी ऋतम्भरा मुख्य वक्ता के रूप मेंं एवं राष्ट्रसेविका समिति की डॉ.श्रीमती जामदार मंचासीन रहीं।

सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन व मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम दरबार के पूजन के साथ हुआ। तत्पश्चात् डॉ.श्री जामदार ने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए मातृशक्ति के समर्पण व सहयोग की योजना से उपस्थित महिलाओं एवं युवतियों को अवगत कराया।

दीदी माँ ने कहा कि देश के प्रत्येक हिन्दू की आस्था भगवान राम से जुड़ी हुई है जब हम सब ठाठ-बाट से रह रहे थे,तब हमारे राम तम्बू में विराजमान थे,ऐसा देखकर हर सनातनी के हृदय में कष्ट होता था इसलिए सम्पूर्ण हिन्दू जनमानस ने संगठित होकर श्रीराम जन्म भूमि मुक्ति आंदोलन चलाया जिसमें देश के साधू-संत,युवा,मातृशक्ति व बच्चों ने मंदिर के लिए शिला ही नहीं अपने प्राण भी अर्पित किए हैं,

जब तक मंदिर निर्माण शुरू नहीं हुआ था, तब तक हम सभी के मन में कहीं न कहीं ग्लानी होती थी लेकिन मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होते ही आत्म संतुष्टि की अनुभूति हो रही है। देश के प्रत्येक रामभक्त की आहूती मंदिर निर्माण में हो इसके लिए सम्पूर्ण राष्ट्र में वृहद निधि समर्पण अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें मातृशक्ति से भी महासंपर्क अभियान में भरपूर समयदान एवं अंशदान की अपेक्षा की गई है।

भगवान श्रीराम के जीवन से हम सभी को जीवन का आदर्श सिखना होगा, उन्होंने किस तरह से अपने प्रत्येक धर्म का पालन किया जिसके कारण से उन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम के रूप में पूजा जाता है। आज भाई-भाई में प्रीति का आभाव है,पारिवारिक विवादों में कोर्ट केश चलते हैं,लेकिन भगवान राम के भाईयों के बीच इतना प्रेम था कि किसी भी भाई ने राज सिंहासन स्वीकार नहीं किया,

इससे हम सभी को सिखना चाहिए साथ ही अपनी संतानों के हृदय में धर्म का बीजारोपण करना हम सभी की जिम्मेदारी है। देश की शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए दीदी माँ ने कहा कि हमारे देश में गुलामी का इतिहास पढ़ाया गया जबकि हमारा इतिहास शौर्य,त्याग और बलिदान का रहा है I

जिसे दबाने की भरसक कोशिश की गई, आज की पीढ़ी को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी सिखाना चाहिए ताकि आगे आने वाली पीढ़ी राष्ट्र,धर्म,समाज के कल्याण के लिए कटिबद्ध रह सके।
कार्यक्रम के समापन चरण में छतरपुर से राम जन्मभूमि अयोध्या जाने वाली मातृशक्ति श्रीमती सुधा चौबे,श्रीमती लता राजे चौहान, श्रीमती राममूर्ति अरजरिया,श्रीमती कुसुम पाटकर को मंचासीन अतिथियों द्वारा शॉल श्रीफल से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर भारी संख्या में मातृशक्ति,तरूणी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद,बजरंग दल, दुर्गावाहिनी,राष्ट्रसेविका समिति से जुड़े पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here