स्वतंत्रता के सौवें वर्ष तक सशक्त समर्थ भारत बनाने का लक्ष्य रखने वाला है- यह सन् 2022 का बजट दूरदृष्टि और अपने दृढ़ संकल्पों को प्रकट करने वाला है यह नये भारत का बजट। इसके माध्यम से नरेन्द्र मोदी की सरकार ने लोकलुभावन के साथ-साथ भारत को सन् 2047 तक की आकाँक्षाओं को सामने रखकर देश को बहुत कुछ देने का अपना संकल्प ही दुहराया है। यह लम्बी राजनीति के लिये अर्थशास्त्र के सुदृढ़ मापदंडों पर आधारित है।

इसमें सुशिक्षित समाज की रचना के अंतर्गत कोरोनाकाल में पढ़ाई से वंचित छोत्रों के लिये 200 टीवी चैनल शुरू करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत शिक्षकों के प्रशिक्षण की भी बेहतर व्यवस्था की जावेगी। जल संरक्षण के अंतर्गत देश में पाँच नदियों को जोड़ने की योजना को कार्यान्वित किया जाना है। गंगा के किनारे पाँच किलोमीटर क्षेत्र को केमिकल मुक्त रखने का भी प्रावधान किया गया है।

जनसंख्या नियोजन, गरीबी उन्मूलन, नारी सशक्ती करण, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ समाज के लिये भी प्रावधान रखे गये हैं।

मौजूदा वित्त वर्ष में विकास दर 9.2प्रतिशत  रहने का अनुमान है। यह तब जब देश कोरोना जैसी महामारी से जूझकर बाहर आया है। इस दूरदर्शी बजट में सन् 2025 तक सभी गाँवों में आप्टिकल फाईवर बिछाने का भी लक्ष्य रखा गया है।

इस बजट में खपत और रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इससे आम आदमी की खरीदने की शक्ति बढ़ेगी तो घरेलू उपभोग में बढ़ोत्तरी होगी। इससे समस्त अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ पहुंचेगा।

मोदी सरकार ने आगामी 25 वर्षों में देश को महाशक्ति बनाने का महत्वाकाँक्षी लक्ष्य सामने रखा है। हमारा देश तकनीकी क्षेत्र में लोहा मनवा चुका है। अब रक्षा क्षेत्र में भी अग्रसर होने को तत्पर है। देश को सशक्त बनाने वाली कई परियोजनाओं पर आगे बढ़ने का संकल्प दिखाया है।  नदियों को जोड़कर पिछड़े इलाकों में खुशहाली लाने के लिये महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाने वाली योजनाओं पर सरकार का जोर रहेगा।

इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता है- आम लोगों के अनुकूल बजट का होना। वित्तमंत्री ने 39.45 लाख करोड़ का बजट पेश किया है। पाँच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लोक- लुभावन वादों से परहेज किया गया है। इससे सरकार की इस दृढ़ संकल्प शक्ति का भी पता चलता है कि अब सरकार की दृष्टि बड़ी योजनाओं की जगह कोरोना से उबरती अर्थव्यवस्था को पिछले वर्षों में घोषित योजनाओं से ही और अधिक संवारने का है। यह मोदी सरकार का नौवाँ बजट है। घरों तक पेयजल पहुचाने, 80 लाख नये आवास बनाने जैसा कार्यक्रम आम जनता को प्रभावित करने वाले हैं। इस बजट ने एक बार चैंका दिया है। बजट में जिस तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रतिबद्धता जताई है, वह स्पष्ट तौर पर पंजाब और पश्चिमी उत्तरप्रदेश के किसानों के लिये संकेत है। सरकार ने खर्च बढ़ाकर महामारी से प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने का प्रयास किया है। इससे माँग भी बढ़ेगी।

बुनियादी ढाँचे में सरकारी निवेश के अर्थव्यवस्था पर गुणात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। कुल मिलाकर अर्थ व्यवस्था में सुधार का मजबूत रास्ता बनेगा। इस सबका सुपरिणाम यह होगा कि सन् 2022-23 में देश की विकास दर दुनिया में सबसे आगे और उज्जवल दिखेगी।

यह बजट भारत को भविष्य में उन्नत और स्वर्णिम बनाने वाला सिद्ध होगा। आर्थिक विकास को गति देने वाले नये वित्त वर्ष के बजट से उत्साहित निवेशकों की चैतरफा लिवाली के आधार पर शेयर बाजार ने बजट के बाद से ही उड़ान भरना शुरू कर दी है।

यही कहा जा सकता है कि सरकार ने बजट के माध्यम से नपा-तुला जोखिम भी उठाया है। मोदी सरकार ने पूंजीगत व्यय केपेक्स को जी.डी.पी. का चार प्रतिशत रखकर चुनौती पूर्ण फैसला लिया है। नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाईप लाईन (एन.आई.पी.) हार्डवेज निर्माण या प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव यानी नये उत्पादन के ऐसेट्स तैयार करना, इस तरह के कदम उठाने से नौकरियों के अवसर मिलते हैं और उत्साहित होकर निजी क्षेत्र पूंजी निवेश करता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर केपेक्स पर एक रूपया खर्च होता है तो एक से सात वर्षों में ढाई से पाँच रूपये तक का अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है। केपेक्स पर खर्च के अन्य लाभ भी हैं।

केन्द्र सरकार के बजट को गरीबों, युवाओं और मध्यमवर्ग को बुनियादी सुविधायें उपलब्ध कराने वाला निरूपित किया गया है। सरकार ने पक्का घर बनाकर सात सालों में तीन करोड़ गरीबों को लखपति बना दिया है और महिलाओं को मालकिन बनाने का महत्वपूर्ण काम किया है। बजट में हर क्षेत्र की जरूरतों का ख्याल रखा गया है।

भाजपा का यह भी मानना है कि देश के गरीबों का उपयोग करने वाले तो बहुत आए लेकिन उनके जीवन को बदलने का काम उनकी सरकार ने किया है। जन धन एकाऊंट के साथ-साथ मुफ्त गैस सिलेन्डर, बिजली कनेक्शन और मुफ्त में घर देने जैसी योजनाओं को लागू किया गया है। देश में लगभग नौ करोड़ घरों में नल से जल पहुंच रहा है, जिसके अंतर्गत पाँच करोड़ घरों में पिछले दो सालों के भीतर पानी पहुंचा है।

आम बजट में (सन 2022-23) में डिजिटल सबसे प्राथमिकता पर है। इकोनामी और सामाजिक ढांचे के सभी वर्गों को एक साथ डिजिटल धागे से गूंथने की घोषणा के साथ-साथ यह भी साफ कर दिया है कि चैथी औद्योगिक क्रान्ति में भारत पिछलग्गू बनकर नहीं रहेगा।

इस बजट में ऐसे तमाम कदम उठाये गये हैं जिनसे भविष्य की अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने की और उसे व्यवस्थित बनाने की पर्याप्त क्षमतायें निहित हैं।

लेखक:- डाॅ. किशन कछवाहा
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