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व्यक्तित्व, कृतित्व, नेतृत्व और प्रतिभा के अनुकरणीय प्रतिरूप दत्तोपंत ठेंगड़ी

नई दिल्ली. प्रसिद्ध विचारक व समाजशास्त्री भारतरत्न दत्तोपंत ठेंगड़ी की जन्मशताब्दी पर उनके संसदीय भाषणों के संकलन Dattopant Thengadi : The Activist Parliamentarian का लोकार्पण डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने किया।

दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के विराट व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि “दत्तोपंत जी के विचार काल सुसंगत थे, उन्होंने जीवनभर जो तपस्या की उसके कारण वे एक व्यक्ति नहीं, बल्कि भारत के साथ एकाकार व्यक्तित्व थे. उन्होंने भारतीय परंपरा के शाश्वत तत्व के साथ तन्मयता स्थापित की।

सदा सत्य उनके विचार त्रिकालबाधित सत्य रह कर आज के प्रश्नों और समस्याओं को निर्देशित करने का काम करते हैं. दत्तोपंत जी का जीनियस स्वरुप उनके चिंतन की गहराई और व्यापक तन्मयता जिसको पाने के लिए उन्होंने अथाह परिश्रम किया, उसमें निहित है।”

1964 से 1976 तक दो कार्यकाल के लिए राज्यसभा सदस्य रहे दत्तोपंत जी के संसदीय जीवन पर सरसंघचाक ने कहा कि “दत्तोपंत जी जननेता थे, वे अनेक वर्षों तक राज्यसभा के सदस्य रहे. वे फैशनेबल विचारों में बहने वाले नहीं थे।

अध्ययन के कारण भारत के शाश्वत विचारों के साथ तात्कालिक भी अर्थात् दोनों को एक साथ देखने की क्षमता थी ठेंगड़ी जी में. वेद- उपनिषद् और सारी विचार सम्पदा कंठस्थ थीं दत्तोपंत जी को. वे सर्वसामान्य लोगों की खुशहाली के लिए प्रयास करने वाले जनसंगठक थे।

उन्होंने सभी जगह सार्थक हस्तक्षेप किया, विचार पटल के सारे रंग उनके लिए अनुकूल हो जाते थे. कुल मिलाकर दत्तोपंत ठेंगड़ी जी का जीवन देश, धर्म, संस्कृति और समाज के लिए समर्पित था।

तीन महापुरुषों – संघ संस्थापक डॉ. केशव हेडगेवार, श्रीगुरुजी और बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सान्निध्य में रहकर ठेंगड़ी जी का मन मस्तिष्क इन तीनों के निकट का था. ठेंगड़ी जी का व्यक्तित्व, कृतित्व, नेतृत्व और प्रतिभा अद्वितीय व अनुकरणीय है।”

प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक को डॉ. अनिर्बान गांगुली और नवीन कलिंगन ने सम्पादित किया है।

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