समय के साथ सबको बदलना होता है- “मोहन राव भागवत सरसंघचालक”

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दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ताओं से संवाद के दौरान बोले संघ प्रमुख

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारकों बैठक के समापन के बाद चित्रकूट से रवाना होने से पहले सर संघचालक मोहन राव भागवत ने दीनदयाल शोध संस्थान के सभी प्रकल्पों के प्रभारियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वावलंबन अभियान का काम देख रहे समाजशिल्पदंपतियों को संबोधित किया।

संस्थान के कार्यकताओं के साथ परिचयात्मक एवं जिज्ञासा बैठक के दौरान संस्थान के कार्यकर्ताओं ने श्री भागवत से पूछा कि वर्तमान में सामाजिक, आर्थिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की परिस्थितियां बन रही है उनमें दीनदयाल शोध संस्थान जैसी संस्थाओं को क्या करना है उनके लिए क्या मार्गदर्शन है।

इसका उत्तर देते हुए सरसंघचालक श्री भागवत ने कहा कि समय बदलता है उसके अनुसार सबको बदलना होता है। आकांक्षएं तो पहले भी थी। वह समाज में चलने वाली मानसिक प्रक्रिया है। प्रवृत्ति हमारी है थोड़ा चिंतन करते रहना चाहिए। कई बातों को तो कोरोना की परिस्थितियों ने बता दिया। ऐसी बातों को पहचानना। उसमें जो शश्वत है, सत्य है, वही चिरंतन है, वही सस्टेनेबल है। जो असत्य है वह सत्य की कसौटी पर टिकने वाला नहीं है। अपना परिवार का पालन पोषण किस तरह करना, समाज की व्यवस्था किस तरह क्ले, सृष्टि ठीक रहे, यह एक अपना तरीका अपने पास है, भारत के पास है।

आयुर्वेद एवं मॉडर्न मेडिसन के साथ इंटीग्रेटेड थेरेपी का मॉडल- इस मौके पर आरोग्यधाम के वरिष्ठ चिकित्सक न्यूरो सर्जन डॉ. मिलिंद देवगांवकर ने बताया कि आरोग्यधाम में आयुर्वेद एवं मॉडर्न मेडिसिन के साथ इंटीग्रेटेड थेरेपी का मॉडल तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, उस पर अनुसंधान भी चल रहा है। उसके अंतर्गत बहुत सारी बीमारियां उसके अंतर्गत आयुर्वेद में बहुत सारी अच्छी दवाइयां है उसको साइंटिफिक तरीके से बाहर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

हमारा काम लोगों को संस्कारवान बनाना- श्री भागवत ने कहा कि हमारा काम है संपर्क के जरिए लोगों को संस्कारवान बनाना। डीआरआई इसी कार्य में लगा हुआ है। इसके सभी कार्यकर्ता इस दिशा में पूरी ईमानदारी से लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि काम हमें अनुभवी बनाता है। लक्ष्य के प्रति प्रतिवद्धता तथा विचारों के प्रति समर्पण हमें संगठन में टिकाए रखता है।

वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा नहीं पहुंचने से नुकसान हुआ पर संस्कार कायम-  संघ प्रमुख ने कहा कि ग्रामीण एवं वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा नहीं पहुंची उसका नुकसान हुआ है लेकिन यहां संस्कारों का नुकसान नहीं हुआ है। शहरी क्षेत्रों में शिक्षा आ गई उसके कारण कुछ नुकसान भी हुआ है। इसीलिए ऐसी बातों पर लोगों को आगे रहना चाहिए, समाज को प्रबुद्ध बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एलोपैथी का भी एक अपना महत्व है। श्री भागवत ने कहा कि चिकित्सा में एक और विचार करना चाहिए जैसे इंटीग्रेटेड थेरेपी एक अलग बात है, वैसे ही स्पेसिफिक थेरेपी भी है। हर व्यक्ति की प्रवृत्ति अलग-अलग होती है पॉलीसिस्टेमिक रिलीफ उसमें सब उपलब्ध है। उसकी कुछ हिस्ट्री है कुछ लक्षण है उसके आधार पर उपचार किया जाना चाहिए।

ऑक्सीजन देने वाले पांच पौधे लगाए- मंगलवार की सुबह सरसंघचालक मोहन भागवत ने आरोग्यधाम में मंदाकिनी कॉटेज (पंचवटी) के समीप पाँच पौधों का रोपण किया गया। पंचवटी में पांच प्रकार बड़, पीपल, आंवला, अशोक और बेल के पौधे लगाए गए। ये वो पौधे हैं जो सबसे ज्यादा आक्सीजन देने वाले हैं।

साभार स्टार समाचार 

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