हमने दो राजनीतिक दलों के गैर-जिम्मेवार नेताओं के बयान देखें है जिसमे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र और उसके महामंत्री श्री चम्पत राय के विरुद्ध गैर-जिम्मेवार और झूठे आरोप लगाये हैं. श्री संजय सिंह का ऐसा रिकॉर्ड ही रहा है. वह आरोप लगाते है, उन पर मुकदमा होता है और वह क्षमा मांगते है.

प्रस्तुत प्रकरण में सारा देन-लेन बैंकों के माध्यम से हुआ है. नकदी के व्यवहार का कोई आरोप नही है.

इस जमीन के मालिक श्रीमती कुसुम पाठक और श्री हरीश पाठक है. उन्होंने काफी पहले सुल्तान अंसारी आदि के पक्ष में agreement-to-sell किया था. वह पंजीकृत हुआ. उसमे जमीन की स्वीकृत मूल्य उस समय के बाज़ार भाव से दो करोड़ रूपये था.

यह जमीन अयोध्या रेलवे स्टेशन के पास है. बहुत उपयोगी है. तीर्थ क्षेत्र ने इस जमीन को लेने के लिए कुसुम पाठक, सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी से बात की. इसको न तो पाठक अकेले बेच सकते थे और न ही तिवारी आदि. सहमति बनी कि agreement-to-sell के अनुसार कुसुम पाठक इसको सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को बेच दें. इसलिए यह सौदा agreement-to-sell में दिए गये मूल्य के अनुसार दो करोड़ में हुआ.

ट्रस्ट ने इसके वर्तमान बाज़ार भाव का पता लगाया. श्री रामजन्मभूमि मंदिर बनने से और उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा नए अयोध्या की चर्चा से अयोध्या में जमीन के भाव बहुत बढ़ गये है. ट्रस्ट ने यह पाया कि प्रस्तुत जमीन का भाव अब 20 करोड़ के आसपास हो गया है. इसलिए ट्रस्ट को 18.50 करोड़ में यह सौदा करना उचित लगा.

यह भी सोचा गया कि यह दोनों काम एक साथ ही कर लेने चाहिए. एक ही व्यक्ति स्टाम्प पेपर लेने गया. इसलिए कौनसा पहले या बाद में मिला इसका कोई औचित्य नही है.

राजनीतिक व्यक्तियों ने अपनी पत्रकार परिषदों में तथ्यों को जान बुझकर बिगाड़ा है. यही लोग रामजन्मभूमि पर मंदिर बनाने के आंदोलन का विरोध करते रहे है. अब इस तरह के झूठ से वह तीर्थ क्षेत्र और श्री चम्पत राय के खिलाफ संदेह का वातावरण बनाने का प्रयत्न कर रहे है.

हम इस बात का विचार कर रहे है कि इस तरह का आरोप लगाने वालो के विरुद्ध मानहानि की कार्यवाही करना उचित होगा और इस बार क्षमा स्वीकार करने की बजाये इस मामले को उसकी परिणति तक पहुंचाना चाहिए.

– आलोक कुमार

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