देश का मनोबल ऊँचा उठाए रखना और चुनौतियों को स्वीकारने की मनोवृत्ति बनाना भी पत्रकारिता का दायित्व है।

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” सिर्फ प्रश्न उठाना पत्रकार की एकमात्र जिम्मेदारी नहीं है। पाठकों में सकारात्मकता को बनाए रखना, देश का मनोबल ऊँचा उठाए रखना और चुनौतियों को स्वीकारने की मनोवृत्ति बनाना भी पत्रकारिता का दायित्व है।”

उक्त आशय के विचार माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति श्री केजी सुरेश ने व्यक्त किए। वो विश्व संवाद केंद्र महाकोशल द्वारा आयोजित हिंदी पत्रकारिता दिवस और नारद जयंती कार्यक्रम वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।

ट्विटर और फेसबुक विवाद पर केजी सुरेश बोले कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान प्रदत्त है, लेकिन कोई भी स्वतंत्रता असीमित नहीं है। देश की अखंडता के खिलाफ षड़यंत्र, समाज के खिलाफ साजिश अथवा अपराध को बढ़ावा देना आदि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है।

कुछ विदेशी अखबारों के पूर्वाग्रह की ओर इंगित करते हुए उन्होंने कहा कि “अमेरिका की आबादी भारत की लगभग एक चौथाई है, फिर भी वहाँ भारत से अधिक कोरोना मौतें हुईं। इन अखबारों ने कब्रिस्तानों के चित्र नहीं दिखाए। लेकिन भारत के बारे में लिखते रहे कि यहाँ सब तरफ मौत है।

भारत सिर्फ एक साल में पीईपी किट, वेंटिलेटर और कोरोना की दवा का निर्यात करने की स्थिति में आ गया। अमेरिका यूरोप से कहीं बड़ा वैक्सीन अभियान भारत चला रहा है, लेकिन इन उत्साहजनक बातों का जिक्र न होना आश्चर्य की बात है।”

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ अधिवक्ता और रा.स्व.सं. महाकोशल के प्रांत संघचालक श्री प्रशान्त सिंह ने वर्तमान संकटकाल में पत्रकारों की भूमिका की चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के बीच के अंतर को समझना होगा, तथा प्रायोजित विमर्श के खतरों से देश को सावधान रहना होगा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए सह प्रांत प्रचार प्रमुख श्री प्रशांत बाजपेई ने महाकोशल क्षेत्र में पत्रकारिता के इतिहास पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का प्रारंभ कोरोना काल में दिवंगत हुए पत्रकारों को श्रद्धांजलि देकर हुआ. इस वेबिनार में महाकोशल के सभी जिलों से सैकड़ों पत्रकार जुड़े।

कार्यक्रम में प्रांत कार्यवाह श्री सुनील देव, प्रांत प्रचारक श्री प्रवीण गुप्त, प्रांत प्रचार प्रमुख श्री विनोद कुमार, सह प्रांत प्रचार प्रमुख श्री शिवनारायण, विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्री गोविंद मिश्र और सचिव श्री श्रीनिवास राव उपस्थित थे।

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