नागरिकता (संशोधन) कानून – 1100 शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों ने #CAA के समर्थन में लिखा पत्र

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देश के कई हिस्सों में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हिंसक प्रदर्शनों के बीच एक बड़ा वर्ग कानून के समर्थन में उतरा है. नागरिकता (संशोधन) कानून (Citizenship Amendment Act) का 1100 शिक्षाविदों, रिसर्च स्कॉलर, बुद्धिजीवियों ने समर्थन किया है. नागरिकता कानून में संशोधन पर संसद को बधाई दी है. सभी ने एक साझा बयान में कहा कि शरणार्थियों के लिए इस कानून की लंबे समय से मांग थी. बुद्धिजीवियों ने देश में कानून के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शन पर भी चिंता जताई और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.

शिक्षाविदों ने कहा कि – ‘भुलाए गए अल्पसंख्यकों के साथ खड़े होने और भारत के सभ्यतागत स्वभाव को बरकरार रखने और धार्मिक प्रताड़ना के कारण जान बचाकर आने वालों को शरण देने के लिए संसद को बधाई.’

समर्थन करने वाले शिक्षाविदों में दिल्ली यूनिवर्सिटी, जेएनयू, इग्नू, आईआईटी और विश्व के कई बड़े संस्थानों में पढ़ाने वाले भारतीय भी शामिल हैं. ‘हम मानते हैं कि CAA भारत के सेक्युलर संविधान के अनुरूप ही है, क्योंकि यह किसी धर्म के किसी व्यक्ति को नागरिकता के लिए अपील से नहीं रोकता है.’

संशोधित कानून के अनुसार 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिन्दू, सिक्ख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के सदस्यों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को अपनी सहमति दी और इसके साथ ही ये विधेयक कानून बन गया.

पत्र में कानून को आवश्यक बताते हुए कहा कि 1950 के नेहरू-लियाकत पैक्ट की असफलता के चलते यह लाया गया है. पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले शरणार्थियों में से ज्यादातर दलित समुदाय के लोग हैं.

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