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मुद्दे की बात करता मतदाता

– प्रशांत बाजपेई

राज्यों के चुनाव परिणाम के साथ दो समाचार और छाए. एक, अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाकर तैयार और दूसरा, दुनिया के कई ताकतर देशों को पीछे छोड़कर, भारत चार हजार ख़रब की अर्थव्यवस्था बन गया. इन तीनों समाचारों में सामंजस्य है.

5 राज्यों में लोकतंत्र का महापर्व उत्साह –धूमधाम से संपन्न हुआ. मतदाताओं ने बढचढकर मतदान किया. महिला मतदाताओं ने अभूतपूर्व उत्साह दिखाया. समाज में बढ़ता जिम्मेदारी का ये भाव संतोष का विषय है. मतदाताओं की जागरूकता ही राजनीति की शुचिता की गारंटी है. मतदान का प्रतिशत बढ़ा है. मध्यप्रदेश में अभी तक सर्वाधिक 76.22 प्रतिशत मतदान हुआ है. प्रतीक्षा उस दिन की है, जब चुनावों में सौ प्रतिशत होने लगेगा.

मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला. तेलंगाना में कांग्रेस सत्ता में आई, और मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट को सफलता मिली. मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच था. चुनाव के परिणाम और मतदान के रुझान यह बतला रहे हैं कि मतदाता विकास और राष्ट्र के लिए वोट कर रहा है. जाति की राजनीति को नकार रहा है.

असली मुद्दे –

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से चला गया सबसे बड़ा दाँव था, जाति. भारतीय जनता पार्टी की ओर से उठाए गए प्रमुख मुद्दे थे विकास, आंतरिक सुरक्षा और देश का सांस्कृतिक गौरव अर्थात भारत की हिंदू संस्कृति के आधार पर  देश का भविष्य गढ़ना. मतदातों ने भाजपा के मुद्दों पर मुहर लगाई. मतदाता देख रहा है कि जाति के नाम पर चलने वाली राजनीति कैसे साम्प्रदायिकता और तुष्टीकरण को पोसती है, और हिंदू हितों का दमन करती है. बिहार में कांग्रेस की सहयोगी नितीश कुमार की सरकार ने जातीय जनगणना करवाई. मीडिया में बैठे कुछ लोग और कुछ तथाकथित बुद्धीजीवी वर्ग इसे भारत की राजनीति को उलट-पलट देने वाला चमत्कारी दाँव बतलाने लगे. नितीश कुमार भी बहुत आत्मविश्वास में भर गए. राहुल गाँधी सब चुनावी सभाओं में जोर-जोर से बोलने लगे कि कांग्रेस जातीय जनगणना करवाएगी.

फिर ही कुछ ही दिनों में बिहार से समाचार आया कि नितीश सरकार ने शिवरात्रि, जन्माष्टमी, राखी और तीज की छुट्टी समाप्त कर दी है, जबकि ईद की छुट्टी 3 दिन की कर दी गई है. बकरीद और मुहर्रम की छुट्टी भी बढ़ा दी गई है. याने हिंदू को जातियों में बाँटना और मुस्लिमों को इस्लाम के नाम पर इकट्ठा करना और इसे सेकुलरिज्म की राजनीति का नाम देना.

इसलिए मतदाता अब सावधानी पूर्वक देखने लगा है. चुनाव के मौसम में मंदिर जाकर और तिलक लगाकर – जनेऊ दिखाकर खुद को हिंदू बताने वालों को वोटर नकार रहा है. वह तय कर रहा है कि वास्तव में हिंदू हितों के लिए , देश के लिए काम कौन कर रहा है. कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने राम मंदिर के निर्माण में रोड़े अटकाए, धारा 370 हटाने का विरोध किया. कांग्रेस के सहयोगियों ने, कांग्रेस नेताओं के पिता-पुत्रों ने सनातन धर्म को डेंगू, हैजा जैसी बीमारी कहा. गोहत्या, धर्मांतरण और लव जिहाद रोकने वाले कानूनों का विरोध किया, राजस्थान में जिहादियों ने कैमरे के सामने निर्दोष कन्हैयालाल की  हत्या की और कांग्रेस पार्टी ने दंगेबाजों-पत्थरबाजों, देश के खिलाफ नारेबाजी करने वालों के अवैध अतिक्रमणों पर बुलडोजर चलाने का विरोध किया.

विकास का मुद्दा और भारत की बढ़ती ताकत का मुद्दा लोगों के मन में गहरी पैठ बना चुका है. लोग आने वाले कल का सोचकर वोट कर रहे हैं. राम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, जगमगाते राजमार्ग, ऋषि संस्कृति के अनुकूल बना भारत का नया संसद भवन, विशाल सैन्य शक्ति नए भारात की पहचान है. भारतवासी स्वयं को इस पहचान से जोड़कर देख रहा है. किसान और श्रमिक का आत्मविश्वास बढ़ा है. आने वाले चुनाव भी इसी भाव भूमि में संपन्न होंगे, यह निश्चित दिख रहा है. मतदाता विकसित, सुरक्षित, शांति-व्यवस्था युक्त भारत चाहता है, भारत की सनातन धारा में  स्वाभिमान के साथ जीना चाहता है और दुनिया को गर्व के साथ राम का गौरव दिखाना चाहता है.