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शत प्रतिशत मुस्लिम ओबीसी आरक्षण संविधान के लिए खतरा है

संविधान, आरक्षण और मंडल कमीशन को खतरा कांग्रेस से है। कांग्रेस ने सैय्यद-शेख-पठान और मुगल जैसी मुस्लिम फिरकों को राज्यों में ओबीसी बनाकर मंडल कमीशन की धज्जियां उड़ा दी हैं। कांग्रेस ने यही काम केंद्र में करने का वादा अपने चुनाव घोषणा-पत्रों में किया है। ओबीसी के लिए ये खतरे की घंटी है।

  • कांग्रेस सभी मुसलमान फिरकों को ओबीसी यानी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा बता रही है।
  • कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में उसने विभिन्न समय में तमाम मुसलमानों को ओबीसी में डालकर उनको आरक्षण दिया है।
  • कर्नाटक में ओबीसी के अंदर कटेगरी 2B बनाकर सभी मुस्लिम फिरकों को आरक्षण दिया गया।
  • उसके घोषणा-पत्रों में वादा है कि यही काम वो केंद्र के स्तर पर करेगी।
  • मंडल कमीशन (चैप्टर -12) सैय्यद-शेख-पठान और मुगल आदि फिरकों को ओबीसी नहीं मानता।
  • ये सैय्यद-शेख-पठान मुस्लिमो में आगे बढ़ी हुई सामान्य के समकक्ष फिरके हैं।

मंडल कमीशन (12.18) के मुताबिक मुसलमान दो ही स्थिति में ओबीसी हो सकता है :-

1. अगर उसके पुरखे पहले हिंदू अछूत रहे हों और

2. हिंदुओं के समकक्ष जातीय पेशे वाले मुसलमान, अगर वो जाति हिंदुओं में ओबीसी है तो।

जैसे – धोबी, तेली, धीमर, नाई, गुज्जर, कुम्हार, लोहार, दर्जी, बढ़ई आदि)।

  • अब मेरा यहां ये कहना है कि हिंदुओं में धोबी, तेली, धीमर, नाई, गुज्जर, कुम्हार, लोहार, दर्जी, बढ़ई इत्यादि का कार्य जाति व्यवस्था के अंतर्गत आता है, चूंकि शरीयत या इस्लाम मे जाति व्यवस्था नही होती। इसलिए मुसलमान का ओबीसी आरक्षण लेना ये शरीयत और कुरान के खिलाफ है। इसके लिए अल्लाह माफ् नही करेगा, दोजख की आग में जलाएगा।
  • उक्त के अलावा बाकी मुसलमान भी ओबीसी नहीं हैं।
  • संविधान विशेष अवसर का सिद्धांत सिर्फ पिछड़ेपन के आधार पर देता है।
  • सैय्यद-शेख-पठान और मुगल आदि फिरके किसी भी मायने में पिछड़ी नहीं हैं। उनमें सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन होने का कोई प्रमाण नहीं है।
  • मुसलमान पिछड़ी जातियों के साथ, सैय्यद-शेख-पठान और मुगल आदि फिरकों को रखने से जो सचमुच पिछड़े हैं, उनका हक मारा जाएगा।
  • सैय्यद-शेख-पठान और मुगल आदि फिरकों से हिंदू या अन्य धर्मों के ओबीसी मुकाबला नहीं कर सकते।
    ये फिरके हिंदू सवर्णों से भी कई मायने में आगे।
  • सवर्ण मुसलमानों को ओबीसी बनाना मंडल कमीशन और संविधान का उल्लंघन है।
लेखक – डॉ. विश्वास चौहान