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हिंदू-मुसलमान कौन कर रहा है?

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कांग्रेस समेत देश के विपक्षी दलों को यह बड़ी शिकायत है कि भाजपा संपन्न होने जा रहे लोकसभा के चुनाव में हिंदू मुसलमान कर रही है। इस मामले में विपक्षी दल पूरी ताकत से प्रधानमंत्री मोदी पर भी यह आरोप लगा रहे हैं कि वह  हिंदू- मुसलमान कर रहे हैं। उनका कहने का आशय है कि इस तरह से भाजपा हिंदू सांप्रदायिकता को बढ़ावा देकर हिंदुओं का ध्रुवीकरण सत्ता में आने के लिए कर रही है। यद्यपि भाजपा पर ऐसा आरोप कोई नया आरोप नहीं है. जब से भाजपा का गठन हुआ और इसके पूर्व जब वह जनसंघ कहलाती थी तो उसके निर्माण के समय से वह कांग्रेस एवं दूसरे विपक्षी दलों की दृष्टि में एक हिंदूवादी एवं मुस्लिम विरोधी पार्टी थी। 

2024 के लोकसभा चुनावों में हिंदूमुसलमान का प्रश्न मुख्यतः मुस्लिम आरक्षण की दृष्टि से खड़ा हुआ। हकीकत यही है कि कांग्रेस पार्टी और दूसरे विरोधी दल बराबर यह प्रयास करते रहते हैं कि मुसलमानों को किसी न किसी ढंग से आरक्षण दिया जाए बड़ी सच्चाई यह है कि बंगाल और कर्नाटक जैसे राज्यों में टीएमसी और कांग्रेस पार्टी ने पूरे मुस्लिम समुदाय को पिछड़ों को मंडल कमीशन के तहत मिलने वाले आरक्षण में शामिल करा दिया है। समय-समय पर उनके द्वारा मुसलमानों के लिए अलग से आरक्षण का भरपूर प्रयास किया गया, परंतु कई बार जिसे देश की शीर्ष अदालत द्वारा नकार दिया गया। संविधान सभा में लेकर जब मुसलमान के लिए आरक्षण की मांग की गई  तब सरदार पटेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा था हम ऐसा करके देश में दूसरा विभाजन स्वीकार करने को तैयार नहीं है। हमने मुसलमानों को पाकिस्तान दे दिया है और यदि वह आरक्षण चाहते हैं तो वहां जा सकते हैं। डॉक्टर अंबेडकर भी मुसलमानों को किसी तरह का भी रंचमात्र का आरक्षण दिए जाने के सख्त के खिलाफ थे। यू आरक्षण की व्यवस्था संविधान में उनके लिए की गई थी जो मुख्य धारा से अलग- थे लग हो गए थे और विकास की दौड़ में बहुत पीछे रह गए थे। जहां तक मुसलमानों का प्रश्न है, उनका स्वयं यह कहना है उन्होंने इस देश पर 600 वर्षों से ज्यादा तक राज्य किया है। अकबरुद्दीन ओवैसी जैसे लोग कहते हैं, यदि 15 मिनट के लिए पुलिस हटा ली जाए तो वह हिंदुओं को औकात बता देंगे। ऐसी स्थिति में यदि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी  यह कहते हैं कि वह एससी एसटी और पिछड़ों का आरक्षण काटकर उन्हें मुसलमानों के दिए जाने के सख्त विरुद्ध हैं तो यह तो संविधान सम्मत बात है। हिंदू मुसलमान को लेकर कांग्रेस पार्टी का क्या रवैया है, उसके लिए उसका लोकसभा चुनावों को लेकर घोषणा पत्र देखा जा सकता है। कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में कहा है, वह मुसलमानों को खान-पान को लेकर पूरी आजादी देना चाहती है। कांग्रेस पार्टी मुसलमानों को अपने निजी कानून को पालन करने का अधिकार देने के लिए पूरी तरह पक्षधर है। जहां तक खान-पान का प्रश्न है वहां यह विचारणीय प्रश्न है कि यह बात घोषणा पत्र में कांग्रेस को क्यों लिखनी पड़ी? इसका मतलब स्पष्ट है कि मुसलमान गौ हत्या कर सकते हैं और गौमांस का सेवन कर सकते हैं। जबकि जिन गांधी की दुहाई कांग्रेस पार्टी देता है उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि उनके लिए गौ संरक्षण का प्रश्न देश की आजादी से भी बड़ा प्रश्न है। जहां तक मुसलमान को निजी कानून के पालन का अधिकार देने का सवाल है? तो क्या कांग्रेस पार्टी यह बताएगी क्या वह मुसलमान के बीच शरिया कानून लगा लागू करना चाहती है और देश को मध्य युग में ले जाना चाहती है। मुसलमानों के लिए निजी कानून की वकालत करने का  एक मतलब यह भी है कि कांग्रेस पार्टी देश में कॉमन सिविल कोड या समान नागरिक संहिता की विरोधी है। यानी उन्हें चार शादियां करने का अधिकार रहेगा, जबकि पाकिस्तान जैसे कट्टरवादी देश में भी ऐसा अधिकार नहीं है। संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में भी संविधान निर्माताओं ने कॉमन सिविल कोड लाने के लिए जोर दिया था, लेकिन जब कांग्रेस पार्टी मुसलमानों के लिए अलग कानून की बात करती है तो यह समझा जा सकता है कि हिंदूमुसलमान कौन कर रहा है?

लेकिन इसके अलावा हिंदू मुसलमान करने को लेकर या जिसे वोट बैंक की राजनीति कहते हैं उसको लेकर के भी देश की आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी और दूसरे विपक्षी दलों के रवैया को लेकर बहुत सारे प्रश्न खड़े होते हैं। यदि उनके लिए हिंदू मुसलमान नहीं था तो वर्ष 1989 में कश्मीर घाटी में हिंदुओं की हत्याओं और उनके पलायन को लेकर कांग्रेस पार्टी चुप्पी क्यों साधे रही? यूपीए के शासन के दौर में घाटी में पत्थरबाजी सतत क्यों चलती रही? जबकि मोदी सरकार के दौर में पत्थर बाजों का कहीं अता-पता नहीं है। यदि कांग्रेस पार्टी हिंदूमुसलमान की पक्षधर नहीं थी तो तीन तलाक जैसे अमानवीय और विभेदकारी कानून को  हटाए जाने के मोदी सरकार के फैसले का विरोध क्यों किया था? हिंदूमुसलमान के चलते ही कांग्रेस पार्टी निमंत्रण होते हुए भी राम मंदिर के प्राणप्रतिष्ठा पर शामिल नहीं हुई, इतना ही नहीं अब तक कोई भी उसका बड़ा नेता वहां नहीं पहुंचा। ऐसा इसलिए की कही उसका वोट बैंक मुस्लिम मतदाता नाराज ना हो जाए। क्या कांग्रेस पार्टी के पास इस बात का जवाब है की टाडा और पोटा जैसे कानून जो आतंकवाद से लड़ने के लिए बनाए गए थे उसे उनकी सरकारों ने मुस्लिम तुष्टिकरण की दृष्टि से क्यों समाप्त कर दिया? आखिर में यह कानून कोई मुसलमान के विरोध में तो बनाए नहीं गए थे। टाडा कानून तो स्वयं   कांग्रेस पार्टी ही लेकर आई थी। बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस पार्टी यदि सच्चे अर्थों में हिंदू-मुसलमान करने के विरुद्ध थी तो उसका आतंकवादियों के प्रति रवैया क्यों नरम था और वह आतंकवादियों को भटके हुए भाई क्यों कहती थी? आतंकवादियों की पैरवी  के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे क्यों खुलवाती थी?  जिहादी आतंकवाद को बैलेंस करने के लिए आखिर में हिंदू आतंकवाद या भगवा आतंकवाद की थ्योरी उसके द्वारा क्यों दी गई थी? जिसका नतीजा था कि पूरे यूपीए शासन के दौर में संपूर्ण देश में आए दिन बमधमाके होते रहते थे। जो 2014 में मोदी सरकार के आते ही बंद हो गए। इधर कुछ वर्षों से देखने में आ रहा है कि हिंदुओं के प्रत्येक त्योहारों पर चाहे वह रामनवमी हो, हनुमान जयंती हो, या दूसरे त्यौहार हो, उस अवसर पर जब जुलूस निकालते हैं तब उन पर पत्थरबाजी और हिंसा होती है, यहां तक की बम भी फोड़े जाते हैं पर विपक्षी दलों के मुस्लिम पक्षधर्ता के चलते उनके मुंह से निंदा के एक शब्द भी नहीं निकलते। इधर कुछ वर्षों से जब से बंगाल में भाजपा का जन समर्थन जैसे-जैसे बढ़ने लगा, वैसे वैसे ही प्रत्येक चुनाव में चाहे वह पंचायत का हो, विधानसभा का हो या लोकसभा का हो, चुनाव के बाद हिंदुओं के साथ  हिंसा, आगजनी और बलात्कार देखने को मिलता है, पर ममता बनर्जी से लेकर सभी धर्म-निरपेक्ष कहने वाले नेताओं के मुंह सिल जाते हैं। कांग्रेस समेत विपक्ष के इसी हिंदूमुसलमान रवैया के चलते जब पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार किए जाते हैं तो उसकी निंदा करने के लिए उनके मुंह से दो बोल भी नहीं निकलते। परंतु जब मोदी सरकार ऐसे लोगों को देश में शरण देने के लिए सीएए कानून लेकर आती है, तो उसे ऐसा प्रचारित किया जाता है कि मोदी सरकार मुसलमानों की नागरिकता समाप्त करने वाली है। इसी के चलते स्वतंत्र भारत में जब हिंदुओं की संख्या 8% से ज्यादा घट जाती है तो इसमें कोई समस्या नहीं है, क्योंकि बढ़ती जनसंख्या देश की अहम समस्या है, परंतु घुसपैठियों, बहु विवाह और परिवार नियोजन से दूरी बनाने के चलते जब मुसलमानों की  जनसंख्या 44% तक बढ़ जाती है और देश की डेमोग्राफी बदलने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। बड़ी बात है कि जिससे हिंदुओं को मध्य युग की तरह पुन द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनने का खतरा पैदा हो गया है। तो यह भी कांग्रेस पार्टी और दूसरे विपक्षी दलों का हिंदूमुसलमान की राजनीति करने का ही मूल कारण है। मणि शंकर अय्यर का जब  कहते हैं कि पाकिस्तान के पास परमाणु बम है इसलिए भारत सरकार से उसे सम्मान मिलना चाहिए। तो इसका भी बड़ा कारण कांग्रेस पार्टी की वोट बैंक की राजनीति है। जिसके चलते पाकिस्तानी सैनिक हमारे सैनिकों के सिर काट कर ले जाते थे। मुंबई में पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा वर्ष 2008 में 26/11 जैसी घटनाएं की जाती थी, जिसमें सैकड़ो नागरिक मारे गए थे। पर इसी हिंदूमुसलमान की सोच के चलते  कहीं मुस्लिम नाराज ना हो जाए, इसलिए यूपीए सरकार द्वारा पाकिस्तान के विरुद्ध कोई सख्त कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं पड़ती थी। जिसकी तस्दीक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा भी अपनी किताब में कर चुके हैं। इस तरह से यह बखूबी समझा जा सकता है कि देश में हिंदूमुसलमान कौन कर रहा है।

लेखक- वीरेंद्र सिंह परिहार
संपर्क सूत्र – 8989419601

 

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