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किसानों के छद्म भेष में चंद देशद्रोहियों ने लाल किले पर झंडा इतनी आसानी से इसलिए लहरा दिया क्योंकि देश का वर्तमान शासक देश के हर नागरिक को अपना मानता है। उसका ध्येय वाक्य है “सबका साथ – सबका विकास !” अगर कोई यह समझता है कि इस नौटंकी से उसने मोदी को कलंकित किया है तो यह उसकी भूल है।

सच तो यह है कि सरकार की समझदारी ने इस पूरे फिजूल से आंदोलन की हवा निकल दी है और आज पूरा देश थू-थू कर रहा है। तथाकथित सेकुलर खान मार्केट गैंग की वह साजिश बेनकाब हो गई है जिसमें हर राष्ट्रीय दिवस को कलंकित करने के लिए किसी भी आंदोलन को जबरन खींचा जाता है और उसका पटाक्षेप हिंसा और तोड़-फोड़ से किया जाता है। मान ही लीजिए कि आज आप हार गए और मोदी जीत गया।

जिसे आप तानाशाह साबित करने पर तुले थे, उसने मौन और संयमित रहते हुए आपकी अराजकता को पूरी दुनिया के सामने नुमाया कर दिया और सिद्ध कर दिया कि यह पूरा आंदोलन एक बड़े षड्यन्त्र का हिस्सा था और इसके पीछे राष्ट्र विरोधी ताकतों का पैसा था।

इसकी कुल जमा आयु शाहीन बाग की तरह गणतंत्र दिवस तक ही थी और इसका उद्देश्य मोदी को तानाशाह और नाकामयाब शासक साबित करना था। मगर आपका दांव उलटा आपके ही गले इसलिए पड़ा कि मोदी ने आपके उत्पात का विरोध न करके आपको जल बिन मछली बना दिया और यह संदेश दिया कि वह तानाशाह नही है बल्कि आप अराजक हो।

जिस तरह तलवारें लहराई गयी, ईंट पत्थर फेंके गए, ट्रैक्टर से पुलिस वालों को कुचलने की कोशिश की गई, पुलिस ने तब भी संयम बरतते हुए अपनी जाण बचाई, पूरे देश ने देखा है। ये देश द्रोही मुठ्ठी भर हैं लेकिन मोदी समर्थको की मुठ्ठियां फिर किसी चुनाव में खुलेंगी और उन्हें ही अपना सिरमौर बनाएगी जो कि आपके गाल पर फिर एक झन्नाटेदार थप्पड़ साबित होगा।

हालांकि यह अंदेशा अभी भी बरकरार है कि कहीं जेहादी इस आंदोलन में भी घुसकर इसे और संगीन न बना दें क्योंकि समूचे विपक्ष को और पाकिस्तान को जो खून खराबा देखना था वह अभी तक हो नही पाया है।

मोदी विरोधी ताकतें पूरी उम्मीद में थीं कि मोदी के सब्र का बांध कभी तो टूटेगा और सरकार और उत्पाती आमने-सामने होंगे। लाशें गिरेंगी और इन्हें लोकतंत्र के नाम पर बकैती का अवसर हाथ आएगा। लेकिन सरकार के संयम ने इनकी इस मंशा पर भी पानी फेर दिया।

हमें गर्व है अपने प्रधानमंत्री और उसके गंभीर राष्ट्र चिंतन पर ! शास्त्र कहता है कि राजा समस्त प्रजा के लिए पिता समान होता है और आपने इनकी उदंडता को माफ कर के अपने कर्तव्य का निर्वहन करके दिखा दिया। लेकिन यह भी ध्यान रखा होगा कि जड़ प्रवृत्ति के लोग विनय का तिरस्कार ही करते हैं और उनका सही इलाज ऐसे लोगों को कठोरतम दण्ड देना ही है।

जो राष्ट्रद्रोही लाल किले के ध्वज दण्ड पर चढ़ा था उसकी पहचान सरल है। उसे कठोरतम दण्ड दिया जाना देश हित में अत्यावश्यक है। इस देश की जनता आशा करती है कि आप अपने इस कर्तव्य का भी सम्यक निवर्हन करेंगे।

जो मोदी समर्थक नाराज़ है कि ऐसा होने ही क्यों दिया गया उनसे विनम्र अपील है कि धैर्यपूर्वक विचार कीजिये कि आपके नेता के धैर्य ने कैसी-कैसी अनहोनी टाल दी हैं ! यह कलयुग है ! कृष्ण युग मे तो शिशुपाल को भी 99 गलतियों तक क्षमा दान दिया गया था। वर्तमान समय में तो इस कालयवन को स्वयं जनता को धराशायी करना होगा !

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