डॉक्टर भीमराव रामजी अम्बेडकर यानि बाबा साहेब केवल किसी एक समुदाय या जाति विशेष में व्याप्त रूढ़ियों, कुरीतियों और बुराइयों हेतु ही चिंतित नहीं थे। […]
युवा शक्ति और संगठन बल से सशक्त राष्ट्र : श्री रामदत्त
शताब्दी युवा शिविर का प्रेरणादायी समापन, राष्ट्र वैभव के संकल्प का आह्वान जबलपुर। विभाग का तीन दिवसीय शताब्दी युवा शिविर श्रीराम महाविद्यालय परिसर में अत्यंत […]
त्याग, तप और तेज की त्रिवेणी — गुरु तेगबहादुर : श्री रामदत्त जी चक्रधर
350वें शहीदी वर्ष पर प्रेरणादायी व्याख्यान संपन्न जबलपुर। सनातन धर्म की रक्षा हेतु अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले सिखों के नौवें गुरु गुरु […]
होली-परंपरा,प्रतीक और वर्तमान की वैचारिक चुनौती
होली भारतीय सांस्कृतिक जीवन का केवल एक उत्सव नहीं,बल्कि सामाजिक चेतना की परीक्षा भी है। रंगों की उन्मुक्तता,सामूहिक उल्लास और लोक परंपराओं की जीवंतता के […]
भोपाल फिल्म फेस्टिवल विवाद: संस्कृति, समाज और वैचारिक दिशा का प्रश्न
भोपाल फिल्म फेस्टिवल को लेकर उठे विवाद केवल किसी आयोजन की नीति-समीक्षा भर नहीं हैं, बल्कि यह प्रश्न भारतीय समाज, संस्कृति, परिवार और युवाओं के […]
भारत का सर्वांगीण विकास समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव – डॉ. मोहन भागवत जी
लुधियाना, 26 फरवरी 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी तीन दिवसीय पंजाब प्रवास के अंर्तगत आज लुधियाना पहुंचे। उन्होंने श्री अरविंदो […]
“दुर्दम्य महारथी आजाद का स्व के लिए महासमर और रुह कंपाती दर्दनाक गाथा”
भारत की फिजाओं को सदा याद रहूँगा, आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आजाद रहूँगा। “मैं आजाद हूँ”। देश भी आजाद हो गया है, आज मेरा बलिदान […]
गाय ही भारत का भविष्य है
— राजकुमार जैन चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. डी.के. राय, नरेन्द्र असाटी हीरापुर गौशाला से नेत्रों की चिकित्सा कर रहे हैं। पूरे प्रांत में गिर […]
खनन योग्य मनुष्य : जब मानव ही उत्पाद बन गया
दीपक द्विवेदी कभी कहा जाता था मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसका जीवन प्रकृति की लय पर चलता था। वह पंचतत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु […]
माधवराव गोलवलकर ‘गुरूजी’ : राष्ट्र जीवन में अप्रतिम योगदान
राष्ट्रऋषि, माधवराव गोलवलकर का जन्म 19 फरवरी, 1906, विजया एकादशी को नागपुर में अपने मामा के घर हुआ था। उनके पिता सदाशिव गोलवलकर उन दिनों […]
