“यदि गुरु तेग बहादुर न होते, तो न हिंदू बचता न सिख” — वेदप्रकाश


350वें शहीदी वर्ष पर छिंदवाड़ा में ऐतिहासिक वीर बाल पथ संचलन

छिंदवाड़ा।
धर्म, आस्था और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी वर्ष एवं वीर बाल दिवस के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छिंदवाड़ा जिला के बालकार्य विभाग द्वारा एक भव्य वीर बाल पथ संचलन का आयोजन किया गया। यह संचलन पुलिस ग्राउंड से प्रारंभ होकर अमित ठेंगे चौक, इंदिरा तिराहा, डॉ. अंबेडकर चौक (सत्कार तिराहा), बीएसएनएल कार्यालय, इंडियन कॉफी हाउस होते हुए पुनः पुलिस ग्राउंड में संपन्न हुआ।

बौद्धिक कार्यक्रम में ओजस्वी विचार

संचलन के उपरांत पुलिस ग्राउंड में आयोजित बौद्धिक कार्यक्रम में गुरुद्वारा प्रबंध कार्यकारिणी के सचिव अजिंदर सिंह बेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर संघचालक राजेंद्र वर्मा ने की। मुख्य वक्ता के रूप में सतपुड़ा विधि महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संघ के विभाग महाविद्यालयीन कार्य प्रमुख वेदप्रकाश तिवारी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा—

यदि गुरु तेग बहादुर न होते, तो न हिंदू बचता और न ही सिख। उनका बलिदान किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत की आत्मा की रक्षा के लिए था।”

उन्होंने बताया कि 1675 ई. में कश्मीरी पंडितों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा हेतु औरंगज़ेब की जबरन धर्मांतरण नीति का विरोध करते हुए गुरु तेग बहादुर जी ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इसी महान त्याग के कारण उन्हें हिंद की चादर” की उपाधि प्राप्त हुई।

चार साहिबजादों का अद्वितीय बलिदान

अपने संबोधन में तिवारी ने गुरु गोविंद सिंह एवं उनके चार वीर पुत्रों—चार साहिबजादों—के शौर्य का स्मरण कराते हुए कहा कि सन् 1704 में धर्म की रक्षा हेतु दिया गया उनका बलिदान मानव इतिहास में अद्वितीय है।
चमकौर के युद्ध में बड़े साहिबजादे अजीत सिंह और जुझार सिंह वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सरहिंद में अत्यंत अमानवीय ढंग से जीवित दीवार में चुनवा दिया गया। यह प्रसंग आज भी समाज को साहस, सत्य और धर्मनिष्ठा की प्रेरणा देता है।

समरसता और सेवा का संदेश

कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थितजनों को रामखिचड़ी का वितरण किया गया, जो सामाजिक समरसता और सेवा-भाव का प्रतीक बना। इस अवसर पर विभाग प्रचारक लखन सिंह, अंशुल शुक्ला, अमोल डबली, सीताराम शर्मा, सुनील सिंधिया, मनोज मिश्रा, धनंजय यादव, शुभम सोनी, गौरब, नरेंद्र माहौर, सुधीर शर्मा सहित नगर के दायित्ववान कार्यकर्ता, मातृशक्तियां, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

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