राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बाद यदि, स्वतंत्र भारत की राजनीति व समाज को किसी ने सर्वाधिक प्रभावित किया है वे हैं पहले गांधी जी व […]
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ERP सिद्धांत, मातृशक्ति और समाज कार्य: भारतीय ज्ञान प्रणाली का विश्लेषण
– डॉ राधा मिश्रा भारतीय समाज अपनी सांस्कृतिक बहुलता, आध्यात्मिक गहराई और परंपराओं की सतत निरंतरता के लिए विश्व में विशिष्ट स्थान रखता है। यहाँ […]
भारत की स्वदेशी जीवनशैली में ‘स्व’ के आयाम – डॉ. मनमोहन वैद्य
भारत की स्वदेशी जीवन-शैली में निहित ‘स्व’ के भारत में निर्मित वस्तुओं का प्रधानतः उपयोग करने के साथ भी अनेक महत्वपूर्ण पहलू हैं। भारत की […]
भारतीय समाज में उभरता सांस्कृतिक और चरित्रगत संकट
भारतीय समाज के सामने आज जो संकट खड़ा है, वह केवल बदलती जीवन-शैली का प्रश्न नहीं है, बल्कि एक गहरा सांस्कृतिक और चरित्रगत परिवर्तन है। […]
जब मानव ही उत्पाद बन गया
कभी कहा जाता था मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसका जीवन प्रकृति की लय पर चलता था। वह पंचतत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश […]
पहचान की राजनीति का विस्तार और बदलती सामाजिक संरचना का नया दौर
बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में पश्चिमी समाज में एक वैचारिक परिवर्तन धीरे-धीरे आकार लेने लगा, जिसने समाज की पारंपरिक संरचनाओं परिवार, विवाह, लिंग पहचान और […]
अपना घुमंतू समाज : भारत की चलती-फिरती सांस्कृतिक विरासत
भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि विविधताओं का विराट संगम है। यहां भाषा, वेशभूषा, खान-पान, रहन-सहन, आस्था और परंपराओं का ऐसा अद्भुत समन्वय दिखाई […]
महावीर का अहिंसा-दर्शन और आधुनिक विश्व की दिशा
भारतीय आध्यात्मिक चेतना के विराट आकाश में भगवान महावीर का व्यक्तित्व एक ऐसे प्रकाशपुंज की भाँति है, जिसकी किरणें सहस्राब्दियों के अंतराल को लांघते हुए […]
बंदूक बनाम संविधान : नक्सलवाद पर सत्य की दृष्टि
भारत का लोकतंत्र केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि विश्वास की वह धारा है जो हर नागरिक को न्याय का अधिकार देती है। लेकिन इसी […]
विवाह, स्वतंत्रता और वैचारिक हस्तक्षेप : क्या समाज प्रयोगशाला बन रहा है?
हाल ही में Allahabad High Court की खंडपीठ ,जिसमें Justice Tarun Saxena और Justice J. J. Munir शामिल थे इन्होंने एक ऐसा निर्णय दिया, जिसने […]
