– डॉ राधा मिश्रा भारतीय समाज अपनी सांस्कृतिक बहुलता, आध्यात्मिक गहराई और परंपराओं की सतत निरंतरता के लिए विश्व में विशिष्ट स्थान रखता है। यहाँ […]
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एक सशक्त सामाजिक रूपांतरण की दास्तान
देश का परिवेश—और उसके साथ दरवेश—इन दिनों अद्भुत रूपांतरण से गुजर रहा है। चारों ओर जो अनुभूति और अनुभाव दिखाई दे रहा है, वह किसी […]
भारत की स्वदेशी जीवनशैली में ‘स्व’ के आयाम – डॉ. मनमोहन वैद्य
भारत की स्वदेशी जीवन-शैली में निहित ‘स्व’ के भारत में निर्मित वस्तुओं का प्रधानतः उपयोग करने के साथ भी अनेक महत्वपूर्ण पहलू हैं। भारत की […]
आध्यात्म और जीवन मूल्यों से ही भारत का उज्ज्वल भविष्य : विनोद कुमार
स्वबोध आधारित शिक्षा पर हुआ चिंतन – भारतीय शिक्षण मण्डल महाकौशल प्रांत का 57वां स्थापना दिवस संपन्न जबलपुर। भारतीय शिक्षण मण्डल महाकौशल प्रांत का 57वां […]
पहचान की राजनीति का विस्तार और बदलती सामाजिक संरचना का नया दौर
बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में पश्चिमी समाज में एक वैचारिक परिवर्तन धीरे-धीरे आकार लेने लगा, जिसने समाज की पारंपरिक संरचनाओं परिवार, विवाह, लिंग पहचान और […]
क्यूबा 2026 समानता के नाम पर शुरू हुआ प्रयोग, आर्थिक पतन पर खत्म
वामपंथी विचारधारा हमेशा समानता, न्याय और गरीबों के उत्थान के आकर्षक नारों के साथ सामने आती है, लेकिन इतिहास का कठोर सत्य यह है कि […]
समरस समाज की सनातन अवधारणा
सनातन समाज की संरचना को समझने के लिए हमें वर्तमान के चश्मे से नहीं, बल्कि उसके अपने दार्शनिक आधार, ऐतिहासिक विकास, लोक परंपरा और सामाजिक […]
पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत – एक प्रवास’
भारत’ दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता, संस्कृति और चेतना का जीवंत प्रतीक है। इसकी भूमि पर हर संघर्ष, हर सपना और हर परंपरा हमें हमारी […]
महावीर का अहिंसा-दर्शन और आधुनिक विश्व की दिशा
भारतीय आध्यात्मिक चेतना के विराट आकाश में भगवान महावीर का व्यक्तित्व एक ऐसे प्रकाशपुंज की भाँति है, जिसकी किरणें सहस्राब्दियों के अंतराल को लांघते हुए […]
बंदूक बनाम संविधान : नक्सलवाद पर सत्य की दृष्टि
भारत का लोकतंत्र केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि विश्वास की वह धारा है जो हर नागरिक को न्याय का अधिकार देती है। लेकिन इसी […]
