धर्मांतरण और अनुसूचित जाति का दर्जा: कानून, समाज और न्याय का जटिल संवाद

भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता उसका संविधान है, एक ऐसा जीवंत दस्तावेज, जो समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर टिका है। लेकिन […]

धर्मांतरण और सामाजिक न्याय: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय का नया विमर्श

23–24 मार्च 2026 को जस्टिस पी.के. मिश्रा व जस्टिस एन.वी. अंजारिया की दो-सदस्यीय पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि: “जो व्यक्ति हिंदू, सिख या […]