“भारतीय परिवारों में बढ़ती खामोशी: सच, भ्रम और समाधान”

भारतीय समाज सदियों से परिवार-आधारित सभ्यता के रूप में पहचाना जाता रहा है। संयुक्त परिवार, कुटुम्ब व्यवस्था, धार्मिक-सांस्कृतिक मूल्य और पारिवारिक दायित्व—ये सब हमारे रिश्तों […]

पहचान की राजनीति का विस्तार और बदलती सामाजिक संरचना का नया दौर

बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में पश्चिमी समाज में एक वैचारिक परिवर्तन धीरे-धीरे आकार लेने लगा, जिसने समाज की पारंपरिक संरचनाओं परिवार, विवाह, लिंग पहचान और […]

धर्मांतरण और सामाजिक न्याय: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय का नया विमर्श

23–24 मार्च 2026 को जस्टिस पी.के. मिश्रा व जस्टिस एन.वी. अंजारिया की दो-सदस्यीय पीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि: “जो व्यक्ति हिंदू, सिख या […]

श्रीराम मंदिर: युवाओं की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना का नया सूर्योदय

भारत के युवाओं को लेकर देश में अलग-अलग ढंग से विमर्श चल रहे हैं। कुछ ताकतें चाहती हैं कि भारत का युवा अपनी ही संस्कृति […]