युवा शक्ति के संकल्प से विश्वपटल पर सशक्त भारत : रामलाल

सागर।
डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जिला सागर द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में “युवा-संवाद” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल, सागर विभाग के संघचालक डाॅ. गौरी शंकर चौबे, सागर जिले के संघचालक डाॅ. धीरेन्द्र मिश्रा एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ. दीपांशु दूबे द्वारा दीप-प्रज्ज्वलन कर किया गया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रबोध, सामाजिक दायित्व और संगठनात्मक चेतना का विकास करना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा० दीपांशु दूबे ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि ‘इंस्टेंट प्लेजर’ त्वरित आनंद आज के युवा वर्ग की एक प्रमुख चुनौती है। भारत के युवा को दीर्घकालिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर कार्य नियोजन करना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए श्री रामलाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर गया है और हमारा लक्ष्य है कि इस पावन अवसर पर हमें भारत के १५ करोड़ परिवारों तक पहुंचना है ।

श्री रामलाल ने कहा की संघ की शुरुआत ही उपहास एवं उपेक्षा से हुई। इसलिए संघ उपेक्षा एवं विरोध से घबराता नहीं है. संघ सदैव वसुधैव-कुटुंबकम के विचार के साथ कार्य करता है। संघ प्रयास करता है कि युवा पीढ़ी अच्छा सोचें, अच्छा बोले एवं अच्छा करे यही देश भक्ति है। आज युवा पीढ़ी के योगदान के कारण भारत विश्व स्तर पर अग्रणी देशों की आँखों में आँखें डालकर बात कर रहा है।

उन्होंने कहा की कभी भी देश में विपत्ति आती है तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सबसे पहले उपस्थित होता है। इस बात की सराहना सभी करते हैं। उन्होंने अपने आगरा के अनुभवों को साँझा करते हुए कहा कि सूरत में प्लेग की आपदा के समय आगरा मेडिकल कॉलेज के स्वयंसेवक रेजिडेंट्स डॉक्टर प्लेग पीड़ितों की मदद हेतु निर्भीक होकर सूरत गए थे। इस प्रकार से हम अपने प्रयासों से राष्ट्र के प्रति अपना प्रेम व्यक्त कर सकते हैं ।

संवाद सत्र के दौरान श्री रामलाल ने युवाओ के द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जिज्ञासा समाधान किए जैसे की –‘ ग्रामीण क्षेत्रों से युवाओं के पलायन को रोकने के लिए खेती में कौन से नए अवसर सृजित किए जा सकते है? का उत्तर देते हुवे कहा की गांव तक अच्छी शिक्षा एवं अच्छे चिकित्सालय स्थापित हो रहे हैं. संघ के स्वयंसेवक विद्या भारती एवं सेवा भारती, एनएमओ आदि संगठनों के माध्यम से सुदूर गांवों तक अच्छी सुविधा पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।

एक अन्य प्रश्न –‘आज के युवाओं में पहचान की उलझन ‘identity-crisis’ की समस्या से संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हुवे श्री रामलाल ने कहा कि – परिवारों में व्यक्तिवाद बढ़ रहा है, हमें अपनी पहचान बड़ा करने की आवश्यकता है, और हमारी सबसे बड़ी पहचान एक हिंदू और एक संस्कृति के रूप में है।

कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की छात्रा नीलम मिश्रा एवं अन्य छात्राओं द्वारा वंदे-मातरम्’ गीत के गायन से किया गया।

इस कार्यक्रम में युवाओं द्वारा बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रचलित लोक नृत्य ‘बधाई’ एवम् अन्य  सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में रजिस्ट्रेशन के माध्यम से 35 अलग अलग श्रेणियों के कुल पाँच 700 युवाओं ने हिस्सा लियाl एवं 100 से ज़्यादा मातृशक्ति सम्मिलित हुईं l

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