आध्यात्म और जीवन मूल्यों से ही भारत का उज्ज्वल भविष्य : विनोद कुमार

स्वबोध आधारित शिक्षा पर हुआ चिंतन – भारतीय शिक्षण मण्डल महाकौशल प्रांत का 57वां स्थापना दिवस संपन्न

जबलपुर। भारतीय शिक्षण मण्डल महाकौशल प्रांत का 57वां स्थापना दिवस श्री गुरु तेग बहादुर खालसा महाविद्यालय में “स्वबोध आधारित शिक्षा” विषय पर गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। स्वागत सत्र में सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र से अभिनंदन किया गया।

मुख्य अतिथि विनोद कुमार ने अपने उद्बोधन में भारतीय जीवन दर्शन की व्यापक व्याख्या करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति समग्रता और संतुलन पर आधारित है। उन्होंने शिक्षा, संस्कार एवं सामाजिक समन्वय को भारत के सर्वांगीण विकास का आधार बताया।

श्री विनोद कुमार ने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति उसके आध्यात्म और जीवन मूल्यों में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज अपने मूल संस्कारों, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को आत्मसात नहीं करेगा, तब तक विकास अधूरा ही रहेगा। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक प्रगति से राष्ट्र सशक्त नहीं बनता, बल्कि उसके साथ-साथ चरित्र निर्माण, नैतिकता और सांस्कृतिक चेतना का विकास भी आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय परंपरा सदैव “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के सिद्धांत पर आधारित रही है, जो समग्र और संतुलित विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि हम अपनी शिक्षा व्यवस्था और जीवनशैली में आध्यात्म और जीवन मूल्यों को पुनः स्थापित करें, तो भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि विश्व में एक आदर्श राष्ट्र के रूप में भी स्थापित होगा।

विशिष्ट अतिथि प्रो. एस. पी. गौतम ने पंचतत्व एवं महाभूतों की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए अंतःशुद्धि के महत्व को रेखांकित किया तथा आत्मविश्वास को सफलता की कुंजी बताया।

मुख्य वक्ता डॉ. संजय पाठक ने “No Gain Without Pain” सिद्धांत को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि बदलते समय में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि भारतीय शिक्षण मण्डल का उद्देश्य शिक्षा में भारतीयता का समावेश कर राष्ट्र निर्माण को सुदृढ़ करना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. आर. एस. चंडोक ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं नैतिक विकास में सहायक सिद्ध होते हैं।

कार्यक्रम का संचालन श्रीमती क्लीं राय द्वारा प्रभावी रूप से किया गया। आयोजन में कला विभाग का विशेष सहयोग रहा, जिसमें विभागाध्यक्ष डॉ. शशि दुबे एवं समस्त प्राध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख विनोद कुमार, विशिष्ट अतिथि प्रो. एस. पी. गौतम (पूर्व अध्यक्ष, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग), मुख्य वक्ता डॉ. संजय पाठक (अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, भारतीय शिक्षण मण्डल), प्रांत संरक्षिका डॉ. अर्चना पाण्डेय, प्रांत मंत्री डॉ. ज्ञानेंद्र त्रिपाठी (जी. एस. कॉलेज, जबलपुर) एवं श्री गुरु तेग बहादुर खालसा महाविद्यालय के प्राचार्य एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. आर एस. चंडोक मंचासीन रहे।

इस अवसर पर प्रांत के अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद्, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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