समरस समाज की सनातन अवधारणा

सनातन समाज की संरचना को समझने के लिए हमें वर्तमान के चश्मे से नहीं, बल्कि उसके अपने दार्शनिक आधार, ऐतिहासिक विकास, लोक परंपरा और सामाजिक […]

पहचान और राष्ट्रीय चेतना की वैचारिक यात्रा: ‘इंडिया से भारत – एक प्रवास’

भारत’ दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता, संस्कृति और चेतना का जीवंत प्रतीक है। इसकी भूमि पर हर संघर्ष, हर सपना और हर परंपरा हमें हमारी […]

अपना घुमंतू समाज : भारत की चलती-फिरती सांस्कृतिक विरासत

भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि विविधताओं का विराट संगम है। यहां भाषा, वेशभूषा, खान-पान, रहन-सहन, आस्था और परंपराओं का ऐसा अद्भुत समन्वय दिखाई […]

सार्वलौकिक विज्ञान और उभरती वैश्विक समस्याएँ : जे. नंदकुमार

भोपाल । बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में “विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व : भारतीय वैज्ञानिकों का संघर्ष” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रज्ञा प्रवाह के […]

महावीर का अहिंसा-दर्शन और आधुनिक विश्व की दिशा

भारतीय आध्यात्मिक चेतना के विराट आकाश में भगवान महावीर का व्यक्तित्व एक ऐसे प्रकाशपुंज की भाँति है, जिसकी किरणें सहस्राब्दियों के अंतराल को लांघते हुए […]