विजयदशमी उत्सव अनुशासन, संस्कृति और राष्ट्रभावना के अद्वितीय संगम का प्रतीक: प्रशांत कुमार

सिंगरौली/जयंत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक, राष्ट्रवादी एवं समाजसेवी संगठन, अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विजयादशमी उत्सव का आयोजन बड़ी धूमधाम और गरिमा के साथ किया गया।
इस अवसर पर पथ संचलन एवं शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन उपनगर जयंत के विजय स्टेडियम, जयंत में संपन्न हुआ, जिसमें 6 वर्ष से 70 वर्ष आयु के स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश अनुशासन एवं उत्साह के साथ सहभागिता की।

पथ संचलन का शुभारंभ विजय स्टेडियम से हुआ, जो गोलमार्केट, शंकर मार्केट, कॉलोनी क्षेत्र से होते हुए बजरंग मार्केट तक पहुंचा और वहीं से पुनः विजय स्टेडियम में संपन्न हुआ।
मार्ग में रहवासी एवं व्यापारी बंधुओं द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया गया। संचलन के दौरान स्वयंसेवकों ने कदम से कदम मिलाकर अनुशासन, एकता और संगठन शक्ति का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ जगदीश लाल (सी एम ओ नेहरू चिकित्सालय), मुख्य वक्ता श्रीमान प्रशांत विभाग प्रचारक सिंगरौली विभाग, माननीय नगर संघचालक श्रीमान नागेंद्र बहादुर सिंह थे। कार्यक्रम में उपस्थिति विभाग कार्यवाह अंजनी के साथ विभाग, जिले, नगर के दायित्ववान पदाधिकारी जे साथ उपनगर कार्यकारिणी एवं सभी स्वयंसेवकों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री प्रशांत ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ के शताब्दी वर्ष की महत्ता, शून्य से शतक तक का यात्रा एवं संघर्ष, संगठन की कार्यपद्धति तथा राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
संघ के 100 वर्ष की साधना के इस ऐतिहासिक अवसर पर स्वयंसेवकों में असाधारण उत्साह और हर्ष का वातावरण देखने को मिला। विजयदशमी उत्सव संघ के अनुशासन, संस्कृति और राष्ट्रभावना के अद्वितीय संगम का प्रतीक बनकर सबके हृदय में अमिट छाप छोड़ गया”

उन्होंने कहा की राष्ट्रभक्ति केवल बड़े अवसरों पर नहीं, बल्कि दैनिक आचरण में झलकनी चाहिए- जैसे पानी-बिजली की बचत, ईंधन का संयमित उपयोग, हेलमेट का नियमित उपयोग, अनुशासन, ईमानदारी और शिष्टाचार भी राष्ट्रसेवा हैं। संघ का मानना है कि अच्छे और जिम्मेदार नागरिक ही किसी भी देश की आंतरिक शक्ति और स्थायी विकास का आधार होते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि इन पाँचों परिवर्तनों को समाज जीवन में समय के अनुकूल लाकर ही हम राष्ट्रहित के महान कार्य को समग्रतापूर्वक कर सकते हैं। समाज संगठन हो सके इसलिए यह पांचो पर कार्य करना है और करते रहना चाहिए विश्व में हम सबसे मजबूत बने इसलिए हम सब स्वयंसेवक संघ के इस नियम पर काम करते हैं कि वह पहले खुद करते हैं और फिर वह और लोगों को उसके लिए कहते हैं इसलिए हमें पहले खुद करना इन पांचों कामों को और फिर और लोगों को साथ लेकर चलना है।

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