हिंदुत्व कोई पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन: विनोद दिनेश्वर


“RSS No to RSS Know :

सिवनी जिले में 11 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महाकौशल प्रांत द्वारा एक ऐतिहासिक युवा सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस सम्मेलन में जिले के विभिन्न अंचलों से आए 700 से अधिक युवाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का भाव जागृत करना रहा।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता विनोद दिनेश्वर, महाकौशल प्रांत के प्रांत प्रचार प्रमुख, रहे। उन्होंने अपने ओजस्वी, प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक उद्बोधन में युवाओं का आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी निर्णायक भूमिका निभाएं। अपने वक्तव्य में उन्होंने महर्षि अरविंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस देश के युवाओं के मन में अतीत का गौरव, वर्तमान की पीड़ा और भविष्य के उज्ज्वल सपने जीवित रहते हैं, वही राष्ट्र विश्व में अग्रणी बनता है।

मुख्य वक्ता ने स्वामी विवेकानंद के प्रेरक विचारों को स्मरण कराते हुए कहा कि “जिस दिन मुझे सौ युवा एक दिशा में चलने वाले मिल जाएं, उस दिन भारत विश्व गुरु बन जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि “जीते वही हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं। देश के लिए मरना कठिन है, किंतु देश के लिए जीना कठिनतम है।” आज के समय में युवाओं को देश के लिए जीने और आवश्यकता पड़ने पर बलिदान के लिए भी सदैव तैयार रहना चाहिए।

अपने संबोधन में उन्होंने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र था, है और रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व कोई पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है, जो वसुधैव कुटुंबकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे सार्वभौमिक मूल्यों की ओर मानवता का मार्गदर्शन करता है। हिंदुत्व किसी के विरोध में नहीं है, बल्कि सर्वेषां अविरोधेन की भावना के साथ सबको साथ लेकर चलने का संदेश देता है।

मुख्य वक्ता ने संघ की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “RSS – No to Know” से “RSS को जानो” तक की यात्रा, वास्तव में भारत को जानने की यात्रा है। उपहास, उपेक्षा और विरोध से लेकर स्वीकार्यता और सहभागिता तक का यह सफर संघ की सामाजिक स्वीकार्यता और उसकी रचनात्मक भूमिका का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन निर्माण नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण से समाज और राष्ट्र निर्माण करना है।

अपने वक्तव्य में उन्होंने वर्ष 2025–26 को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह कालखंड कई ऐतिहासिक स्मृतियों से जुड़ा है- गुरु तेग बहादुर की शहादत के 350 वर्ष, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, वंदे मातरम् गीत की 150वीं जयंती तथा विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी वर्ष। उन्होंने यह भी कहा कि 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती है और उससे एक दिन पूर्व युवाओं का इस प्रकार एकत्र होना अपने आप में सौभाग्य की बात है।

सम्मेलन में युवाओं से आह्वान किया गया कि वे संघ के मूल्यों- अनुशासन, सेवा, समर्पण और राष्ट्रनिष्ठा- को अपने जीवन में अपनाएं। युवा ही राष्ट्र का भविष्य हैं और अपने चरित्र, कर्म और चिंतन से वे भारत को पुनः विश्व गुरु बना सकते हैं।

कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं

सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर आकर्षक और ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियां लगाई गईं। जनजातीय नायकों की प्रदर्शनी में उनके जीवन, संघर्ष और योगदान को दर्शाया गया, जिसने युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ा। संघ की शाखाओं में होने वाले खेलों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें युवाओं ने शारीरिक दक्षता और अनुशासन का परिचय दिया।

इसके अतिरिक्त संविधान और संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर आधारित एक विस्तृत प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें संघ की स्थापना से लेकर वर्तमान तक के कार्य, विचार और सामाजिक योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्राचीन सिक्कों की प्रदर्शनी भारत के ऐतिहासिक वैभव को दर्शाने वाला विशेष आकर्षण रही। वहीं पंच परिवर्तन, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण और स्व की जागृति जैसे विषयों पर आधारित प्रदर्शनी ने युवाओं को सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया।

यह युवा सम्मेलन संघ के शताब्दी वर्ष और स्वामी विवेकानंद जयंती के पावन अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने न केवल संघ की विचारधारा को समझा, बल्कि अपने प्राचीन गौरव और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रत्यक्ष अनुभव किया। सिवनी जिले में आयोजित यह सम्मेलन युवाओं को समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक जागरूकता की दिशा में प्रेरित करने वाला एक स्मरणीय आयोजन सिद्ध हुआ। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की श्रृंखला निरंतर जारी रहेगी।

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