अनेक विरोधों के बाद हिन्दू और हिंदुत्व की परिकल्पना साकार हुई : प्रवीण जी गुप्त

पन्ना। अंतरराष्ट्रीय तीर्थभूमि पन्ना में आयोजित महाकौशल प्रांतीय युवा सम्मेलन के अवसर पर क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख प्रवीण गुप्त ने अपने सारगर्भित बौद्धिक उद्बोधन में कहा कि अनेक विरोधों, आरोपों और प्रतिबंधों के बावजूद हिन्दू और हिंदुत्व की परिकल्पना आज साकार रूप में समाज के सामने है। उन्होंने कहा कि यह शताब्दी यात्रा त्याग, तपस्या, अनुशासन और संगठन की शक्ति का परिणाम है।

सम्मेलन का शुभारंभ संघीय परंपरा के अनुसार ध्वज आरोहण, वंदन एवं एकल गीत के साथ हुआ। इसके पश्चात जिला कार्यवाह द्वारा मुख्य वक्ता का परिचय कराया गया। हजारों की संख्या में उपस्थित युवा स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए श्री गुप्त ने स्वामी विवेकानंद और बाल गंगाधर तिलक के विचारों का उल्लेख करते हुए युवाओं में शौर्य, संकल्प और राष्ट्रनिष्ठा के महत्व को रेखांकित किया।

अपने उद्बोधन में उन्होंने संगठन की शक्ति को उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि असंगठित समाज दुर्बल होता है, जबकि अनुशासित और संगठित समाज दूरगामी, सकारात्मक और मजबूत परिणाम देता है।

श्री गुप्त ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से लेकर सौ वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार संघ को प्रारंभिक काल से ही उपहास, आरोपों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि विजयादशमी के दिन नागपुर में स्थापित संघ की शाखाओं को कभी “पागलपन” कहा गया, किंतु वही संगठन आज देश का सबसे अनुशासित और व्यापक संगठन बनकर खड़ा है।

उन्होंने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन भौतिक सुखों से दूर राष्ट्र साधना के लिए समर्पित था। बाल्यकाल से ही उनकी निर्भीकता, अंग्रेजी शासन के विरोध और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका ने उनके संकल्प को स्पष्ट किया।

उद्बोधन में महात्मा गांधी की हत्या के बाद लगे आरोपों, 1975 के आपातकाल के दौरान झेली गई यातनाओं तथा विभिन्न कालखंडों में लगाए गए प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि संघ ने हर परिस्थिति में अपने विचारों की स्थिरता बनाए रखी।

स्वामी विवेकानंद के “मुझे सौ युवा मिल जाएँ” वाले कथन और बाल गंगाधर तिलक के युवाशक्ति संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए श्री गुप्त ने कहा कि आज भारत की जाग्रत तरुणाई राष्ट्र निर्माण में अग्रदूत बन रही है-चाहे वह शौर्य-पराक्रम हो या नवीन अनुसंधान और अन्वेषण।

समापन पर उन्होंने कहा कि पन्ना की पुण्यभूमि-वीर प्रसूता, संत प्रसूता और ऋषि परंपरा की धरती-पर यह विशाल युवा सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पूरे मैदान में उमड़ा युवाओं का सैलाब संघ साधना, अनुशासन और संगठन की शक्ति का जीवंत उदाहरण रहा।

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