नारी शक्ति का उदय: सरकारी योजनाओं से संवरी प्रदेश की बेटियों की तकदीर

मध्य प्रदेश। प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं और ‘लखपति दीदी’ अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाना शुरू कर दिया है। जहाँ एक ओर बालाघाट की सुमा उइके ने मुद्रा लोन के माध्यम से उद्यमिता की मिसाल पेश की है, वहीं छिंदवाड़ा की पूजा माहोरे ने प्राकृतिक खेती और गौपालन को अपनी सफलता का आधार बनाया है।

मजदूरी से ‘लखपति दीदी’ तक का सफर

बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड की रहने वाली सुमा उइके की कहानी संघर्ष और साहस की मिसाल है। एक समय था जब सुमा का परिवार मजदूरी पर निर्भर था और महीने की कुल आय मात्र 4500 रुपये थी। 2019 में ‘जनजातीय आजीविका स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद उनकी किस्मत बदली।

उन्होंने पहले जैविक मशरूम उत्पादन और कैंटीन संचालन से शुरुआत की, लेकिन उनकी सबसे बड़ी सफलता तब आई जब उन्होंने 6 लाख रुपये का मुद्रा ऋण लेकर अपना खुद का ‘थर्मल थेरेपी सेंटर’ शुरू किया। आज सुमा की व्यक्तिगत आय 19 हजार रुपये और परिवार की कुल आय 32 हजार रुपये प्रतिमाह हो गई है। सुमा ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त किया, बल्कि अन्य महिलाओं को भी अपने सेंटर में रोजगार दिया है। उनकी इस उपलब्धि का जिक्र स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में किया है।

प्राकृतिक खेती और गौपालन से बढ़ाया मान

दूसरी ओर, छिंदवाड़ा जिले के ग्राम रोहनाकला की पूजा माहोरे ने आधुनिक और पारंपरिक खेती का बेहतरीन मेल प्रस्तुत किया है। रसायनों के कारण घटती मिट्टी की उर्वरता और बढ़ती लागत से परेशान पूजा ने कृषि विभाग की ‘आत्मा परियोजना’ के तहत प्रशिक्षण लिया।

आज पूजा एक एकड़ में पूरी तरह रसायन मुक्त सब्जियां उगा रही हैं और जैविक कीट नियंत्रक (जैसे जीवामृत और ब्रह्मास्त्र) खुद तैयार करती हैं। सब्जियों से मिलने वाले 10 हजार रुपये के शुद्ध लाभ के साथ-साथ उन्होंने देसी गिर और साहीवाल नस्ल की 10 गायों का पालन भी शुरू किया है। दूध की बिक्री से उन्हें प्रतिमाह 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। पूजा अब अपने क्षेत्र की अन्य महिला किसानों के लिए एक ‘कृषि सखी’ के रूप में मार्गदर्शक बन गई हैं।

आत्मनिर्भरता की नई पहचान

ये दोनों ही महिलाएं इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का सहारा मिले, तो गांव की महिलाएं भी बड़े व्यापारिक मॉडल तैयार कर सकती हैं। प्रदेश सरकार की इन योजनाओं ने न केवल इन महिलाओं के घर का चूल्हा सुलगने में मदद की है, बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान और सम्मान भी दिलाया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *