सतपुड़ा अंचल के पातालकोट में भव्य हिंदू सम्मेलन, जनजातीय संस्कृति का गौरवपूर्ण प्रदर्शन
परासिया । सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के पवित्र अंचल पातालकोट स्थित ग्राम लौटिया, जिला परासिया में एक विशाल एवं भव्य हिंदू सम्मेलन का सफल आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंच पर संत नागेंद्र (अनगढ़ हनुमान मंदिर, छिंदवाड़ा), वासुदेवानंद महाराज (जामसावरी) सहित अनेक संत-महात्मा गरिमामयी उपस्थिति में रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ जनजातीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ। पारंपरिक नृत्य, वाद्ययंत्र और जनजातीय वेशभूषा में किया गया स्वागत पूरे आयोजन का आकर्षण रहा, जिसने पातालकोट की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।

मुख्य वक्ता श्री बृजकांत जी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा, “धरती माता को माँ कहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। प्रकृति का हर पूजक मूलतः जनजाति है।” उन्होंने कहा कि विश्व कल्याण की कामना केवल हिंदू समाज की मूल भावना रही है। सेवा के नाम पर होने वाले धर्मांतरण को उन्होंने सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध बताया और कहा कि यदि धर्म और संस्कृति सुरक्षित रहेंगी, तभी जनजातीय पहचान भी अक्षुण्ण रहेगी।
श्री बृजकांत जी ने कहा कि भगवान शंकर जनजातीय समाज के आराध्य हैं और समाज को उन्नत बनाने के लिए छुआछूत जैसी कुरीतियों को समाप्त करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है, जिसमें संतों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रकृति संरक्षण में जनजातीय समाज के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि पूरी दुनिया इस समाज की ऋणी है।
अपने संबोधन में उन्होंने रानी दुर्गावती, भगवान बिरसा मुंडा और माता शबरी का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी हिंदुत्व और राष्ट्र के लिए किए गए अपने महान कार्यों के कारण आज पूजनीय हैं।
उन्होंने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि नगर में रहने वाला नगरवासी, ग्राम में रहने वाला ग्रामवासी और वन में रहने वाला वनवासी-ये सभी शब्द हमारी संस्कृति और जीवनशैली से स्वाभाविक रूप से जुड़े हैं। अंत में उन्होंने सभी समाजों से आह्वान किया कि आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट हों और विश्व कल्याण के संकल्प के साथ कार्य करें-यही हमारा परम लक्ष्य है।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने का संकल्प लिया।
