युवा ही राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति : हेमंत मुक्तिबोध

छिंदवाड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छिंदवाड़ा जिला महाविद्यालयीन कार्यविभाग द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में स्थानीय ओलंपिक मैदान में भव्य युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में जिले के गाँव-गाँव एवं नगर की प्रत्येक बस्ती से बड़ी संख्या में युवाओं ने सहभागिता कर राष्ट्रनिर्माण के प्रति अपनी जागरूकता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया।

सम्मेलन में श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगाँठ, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्मशताब्दी तथा स्वामी विवेकानंद जी की 163वीं जयंती के अवसर पर उनके त्याग, संघर्ष और विचारों पर सारगर्भित चर्चा की गई। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह श्री हेमंत मुक्तिबोध ने अपने उद्बोधन में भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने जनजातीय समाज को अन्याय, शोषण और गुलामी के विरुद्ध संघर्ष की चेतना दी। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण के महान प्रतीक थे।

श्री मुक्तिबोध ने युवाओं से सेवा, अनुशासन और सामाजिक समरसता को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि संघ का कार्य केवल संगठन निर्माण नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर उन्होंने कहा कि “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” का संदेश आज के युवाओं के लिए मार्गदर्शक मंत्र है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सशक्त राष्ट्र की नींव मजबूत परिवारों से ही बनती है। युवाओं से परिवार के साथ समय बिताने, बुजुर्गों का सम्मान करने और सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया गया। साथ ही उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य—पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया तथा स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का संदेश दिया।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि श्री शरबजीत सिंह अरोड़ा, कोषाध्यक्ष गुरुद्वारा कमेटी ने श्री गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगाँठ पर उनके बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। उनका बलिदान आज भी युवाओं को सत्य, साहस और धर्म की रक्षा की प्रेरणा देता है। सम्मेलन में युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न सत्रों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, सेवा, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना का संचार किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास कर उन्हें राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ।

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