बेटियों के अधिकार की प्रहरी बनीं ज्योति तिवारी

सागर। बुंदेलखंड क्षेत्र में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति आज भी अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है। कई परिवार पुत्री को बोझ मानकर अथवा सामाजिक भय और मान-सम्मान की चिंता के कारण कम आयु में ही उनका विवाह कर अपनी जिम्मेदारी पूर्ण मान लेते हैं। परिणामस्वरूप अनेक बालिकाएं समय से पूर्व विवाह के कारण शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों का सामना करने के लिए विवश हो जाती हैं।

ऐसे समय में सागर जिले की प्रधान आरक्षक ज्योति तिवारी सैकड़ों बालिकाओं के लिए आशा की किरण बनकर सामने आई हैं। उनके अथक प्रयासों से पिछले सात वर्षों में 550 से अधिक बालिकाओं को बालिका वधु बनने से बचाया गया। आज ये बालिकाएं शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को नई दिशा दे रही हैं।

बाल विवाह रोकने हेतु शासन ने वर्षों पूर्व कानून बनाया था तथा जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में मध्यप्रदेश पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम बाल विवाह की सूचना मिलने पर तत्काल कार्यवाही करती है। सागर पुलिस की विशेष किशोर इकाई में वर्ष 2016 से पदस्थ प्रधान आरक्षक ज्योति तिवारी को वर्ष 2018 में बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

प्रारंभिक समय में संसाधनों और सूचनाओं के अभाव के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। किन्तु ज्योति तिवारी ने स्वयं का एक सुदृढ़ सूचना तंत्र तैयार किया। धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों से बाल विवाह की सूचनाएं मिलने लगीं। अपनी विशेष टीम और पुलिस सहायता के माध्यम से उन्होंने अभियान को गति दी और देखते ही देखते वे गांव-गांव में “बाल विवाह रोकने वाली मैडम” के नाम से पहचानी जाने लगीं।

ज्योति तिवारी बताती हैं कि जब उन्होंने पहली बार बाल विवाह रुकवाने का प्रयास किया, तब उन्हें अत्यधिक विरोध का सामना करना पड़ा। उन्हें सूचना मिली थी कि ओडिशा से एक नाबालिग बालिका को लाकर उसकी एक अधेड़ व्यक्ति से जबरन शादी कराई जा रही थी। गांव पहुंचने पर भारी संख्या में लोग एकत्रित हो गए और बालिका को छिपा दिया गया।

लगभग छह घंटे तक परिस्थिति अत्यंत कठिन बनी रही। अंततः टीम ने बालिका को खोज निकाला। ज्योति तिवारी बताती हैं कि उन्हें देखते ही बालिका रो पड़ी और कहने लगी — “मुझे विवाह नहीं करना है।” बालिका को सुरक्षित बाहर लाने में पुलिस सहायता लेनी पड़ी। इस घटना ने उनके मन में बाल विवाह के प्रति दृढ़ संकल्प उत्पन्न किया और उन्होंने ठान लिया कि जितना संभव होगा, वे जिले में बाल विवाह नहीं होने देंगी।

ज्योति तिवारी के अनुसार पिछले सात वर्षों में उन्होंने लगभग 550 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। उनकी सक्रियता से सुदृढ़ सूचना तंत्र विकसित हुआ और लोग स्वयं आगे आकर जानकारी देने लगे। कई मामलों में विवाद भी हुए, किन्तु अधिकांश परिवार समझाइश के बाद बालिकाओं के बालिग होने तक विवाह स्थगित करने के लिए सहमत हो गए।

हालांकि वे मानती हैं कि सामाजिक परिस्थितियां आज भी चुनौती बनी हुई हैं। अनेक परिवार सुरक्षा, सामाजिक दबाव अथवा अन्य कारणों से पुत्रियों का शीघ्र विवाह करना चाहते हैं। मजदूरी करने वाले परिवारों की चिंताएं भी अलग होती हैं। समाज में व्याप्त सोच के कारण बाल विवाह की घटनाएं अभी भी सामने आती रहती हैं।

हाल ही में भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा विशेष सेवाएं देने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रधान आरक्षक ज्योति तिवारी को महिला एवं बाल संरक्षण तथा बाल विवाह रोकने के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित के. एफ. रुस्तमजी अतिविशिष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति प्रमाण-पत्र तथा बारह बोर बंदूक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

ज्योति तिवारी का यह कार्य केवल एक सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज में परिवर्तन का प्रेरणास्रोत बन चुका है। उनके प्रयासों ने सैकड़ों बालिकाओं के जीवन को नया मार्ग प्रदान किया है।

सौजन्य – ETV Bharat

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