सागर के आशीष शुक्ला का दोहरा संकल्प—विदेश में नेतृत्व, अयोध्या में गुरुकुल

सागर। डॉ. हरिसिंह गौर की नगरी सागर के एक और सपूत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित कर नगर और महाकौशल का गौरव बढ़ाया है। सागर के मकरोनिया निवासी आशीष शुक्ला ने ब्रिटेन के स्थानीय चुनाव में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त करते हुए काउंसलर पद पर विजय प्राप्त की है।
आशीष शुक्ला ने ब्रिटेन की लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रत्याशी के रूप में स्थानीय परिषद चुनाव में भाग लिया और साउथबरो तथा विडवरो क्षेत्र से काउंसलर निर्वाचित हुए। यह दायित्व भारत की महानगरपालिका के पार्षद पद के समान माना जाता है। काउंसलर स्थानीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा पर्यावरण जैसे विषयों पर कार्य करते हैं। वहां इस दायित्व का कार्यकाल चार वर्षों का होता है।
आशीष शुक्ला मूल रूप से सागर के निवासी हैं। उनके पिता आर. जी. शुक्ला दूरसंचार विभाग में उपमहाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं तथा उनकी माता गायत्री शुक्ला हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सागर में प्राप्त की। इसके पश्चात उच्च शिक्षा छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु से ग्रहण की तथा हैदराबाद, बेंगलुरु और मुंबई में कार्य भी किया। वर्ष 2001 में वे अमेरिका गए और वर्ष 2004 में ब्रिटेन में स्थायी रूप से रहने लगे।
वे सागर के महान शिक्षाविद् डॉ. हरिसिंह गौर को अपना आदर्श मानते हैं। वर्तमान में वे वरिष्ठ प्रौद्योगिकी और उपयोगिता क्षेत्र के विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। उनकी पत्नी सलोनी शुक्ला भी प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कार्यों का संचालन कर रही हैं। उनकी इस उपलब्धि पर उनके माता-पिता ने हर्ष व्यक्त किया है।
ब्रिटेन में रहते हुए भी आशीष शुक्ला ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से अपना गहरा जुड़ाव बनाए रखा। उन्होंने वहां भारतीय समाज को सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास किया। गणेश पूजन, दुर्गा पूजा तथा रामचरितमानस पाठ जैसे अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया गया।
आशीष शुक्ला का मानना है कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन की दिशा है। उन्होंने बताया कि वे अयोध्या के निकट 35 एकड़ भूमि पर “एकम” नामक एक आवासीय गुरूकुल की स्थापना करने जा रहे हैं। इस गुरूकुल में आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारत की पारंपरिक और वैदिक ज्ञान परंपरा का भी अध्ययन कराया जाएगा।
विदेश में रहकर अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ाने का आशीष शुक्ला का प्रयास अनेक युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है।

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