अनुशासन, सेवा और समर्पण की पाठशाला : संघ की शाखाएँ

रीवा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में बाल स्वयंसेवकों का पथ संचलन रीवा नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए पद्मधर पार्क में उत्साह और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। पथ संचलन के उपरांत आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बाल स्वयंसेवकों, कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नगर संघचालक श्रीमान चारुदत्त चालीसगांवकर ने अपने उद्बोधन में बच्चों को राष्ट्रभक्ति, संस्कार और समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबज़ादों ने धर्म और देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर आज के बालकों को भी राष्ट्र के लिए अच्छे नागरिक बनने का संकल्प लेना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि संघ की शाखाओं में खेल-खेल के माध्यम से अनुशासन, सेवा भावना और समर्पण का संस्कार विकसित होता है, जो बाल स्वयंसेवकों को भावी राष्ट्रनिर्माण के लिए तैयार करता है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत एवं भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुआ।

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