और देश बंट गया” केवल इतिहास नहीं बताती, यह उस त्रासदी की कहानी है जिसने भारत की आत्मा को झकझोर दिया। यह पुस्तक श्री हो. वे. शेषाद्रि के अंग्रेजी ग्रंथ “The Tragic Story of Partition” का हिंदी संस्करण है। लेखक ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर भारत विभाजन तक के उन घटनाक्रमों को अत्यंत गहन और तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत किया है, जिन्होंने भारत को दो हिस्सों में बाँट दिया।
यह पुस्तक केवल घटनाओं का विवरण नहीं देती, बल्कि यह बताती है कि कैसे ब्रिटिश साम्राज्य की विभाजनकारी नीतियों, मुस्लिम लीग की महत्वाकांक्षाओं, और कांग्रेस नेतृत्व के दबावपूर्ण निर्णयों ने मिलकर भारत के इतिहास को एक दर्दनाक मोड़ पर ला खड़ा किया।
पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ
- ब्रिटिश सरकार की “फूट डालो और राज करो” नीति का चरणबद्ध विश्लेषण।
- खिलाफत आंदोलन और उसके दूरगामी परिणामों की गहन समीक्षा।
- मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना के राजनीतिक षड्यंत्रों का पर्दाफाश।
- 1937 के प्रांतीय चुनावों के बाद जिन्ना की रणनीति में आए बदलावों का स्पष्ट चित्रण।
- कांग्रेस की मजबूरियाँ और पाकिस्तान प्रस्ताव (1940) की पृष्ठभूमि।
- भारत छोड़ो आंदोलन और ब्रिटिश चालों के बीच भारत के बंटवारे की ओर बढ़ते कदम।
यह पुस्तक क्यों पढ़ें?
यह कृति केवल इतिहास का अध्ययन नहीं, बल्कि राष्ट्र-बोध का जागरण है।
इस पुस्तक को पढ़कर पाठक समझ सकते हैं कि —
- भारत का विभाजन केवल राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि दशकों की सुनियोजित साजिश का परिणाम था।
- कांग्रेस, मुस्लिम लीग और ब्रिटिश सरकार के बीच छिपे दबावों और समझौतों ने कैसे राष्ट्र को विभाजन के कगार पर ला खड़ा किया।
- जिन्ना और मुस्लिम लीग ने दंगों की आग लगाकर कैसे विभाजन को अपरिहार्य बना दिया।
“और देश बंट गया” प्रत्येक राष्ट्रभक्त के लिए अनिवार्य पठनीय ग्रंथ है।
यह केवल अतीत की त्रासदी नहीं सुनाता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह चेतावनी भी देता है कि यदि हम इतिहास से नहीं सीखेंगे तो वही गलतियाँ दोहराई जा सकती हैं।
हर उस व्यक्ति के लिए, जो समाज के उत्थान, राष्ट्रप्रेम और भारतीय इतिहास की गहराइयों को समझने का इच्छुक है, यह पुस्तक एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक अनुभव है। इसे पढ़ें और अपने पुस्तकालय में सम्मानपूर्वक स्थान देकर इसके महत्व को अमर करें।
समीक्षक – प्रवीण मिश्रा
