राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम प्रांत प्रचारक रहे शांताराम सराफ का 5 सितंबर 2025 को रायपुर में 93 वर्ष की आयु में शांतिपूर्वक निधन हो गया। वे लंबे समय तक संघ कार्य में सक्रिय रहकर छत्तीसगढ़ में संगठन को मजबूत आधार देने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं में शामिल थे।
शांताराम सराफ का जन्म 10 मार्च 1932 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले के यावल में हुआ था। परिवार में उन्हें रामभाऊ नाम से पुकारा जाता था। उनके पिता त्र्यंबक सराफ और माता कमलादेवी थीं। बचपन से ही घर का वातावरण राष्ट्रभावना से ओतप्रोत था, जिसका उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ा।
प्रचारक जीवन प्रारंभ करने से पहले वे सागर के एक बैंक में कार्यरत थे। बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक प्रचारक बनने का निर्णय लिया। प्रारंभ में परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने संघ कार्य को ही अपने जीवन का ध्येय बना लिया।
संघ में उन्होंने कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। वर्ष 1963 में उन्हें दुर्ग जिला प्रचारक बनाया गया। 1967 में वे रायपुर विभाग प्रचारक बने और 1989 में उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम प्रांत प्रचारक नियुक्त किया गया। आगे चलकर उन्होंने मध्य क्षेत्र के प्रचार प्रमुख और संपर्क प्रमुख के रूप में भी कार्य किया, जिनका केंद्र जबलपुर रहा।
उनके कार्यकाल में रायपुर में संघ का कोई स्थायी कार्यालय नहीं था। उस समय जयस्तंभ चौक के पास जयराम सिनेमा के ऊपर एक छोटे कमरे से संघ कार्य संचालित किया जाता था। बाद में उनके प्रयासों से ‘जागृति मंडल’ नामक संघ कार्यालय का निर्माण हुआ। इस भवन के निर्माण में उन्होंने स्वयं श्रमिकों के साथ मिलकर काम किया।
छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में सांस्कृतिक जागरण के लिए भी उन्होंने महत्वपूर्ण प्रयास किए। मुंगेली जिले के मदकू द्वीप में उनके प्रयासों से पुरातात्विक उत्खनन प्रारंभ हुआ, जिसमें 19 प्राचीन शिवलिंग प्राप्त हुए और इस स्थान का धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व पुनः स्थापित हुआ। इसके अलावा नवागढ़ में गणेश मंदिर के निर्माण में भी उनका मार्गदर्शन रहा।
शांताराम सराफ अपनी सादगी, अनुशासन और मधुर स्वभाव के लिए जाने जाते थे। उनकी स्मरण शक्ति अत्यंत तेज थी और उन्हें सैकड़ों कार्यकर्ताओं के नाम व फोन नंबर याद रहते थे। बच्चों के प्रति विशेष स्नेह के कारण वे हमेशा अपनी जेब में टॉफियां रखते थे और जहां भी जाते, बच्चों को बांटते थे।
उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित रहा। छत्तीसगढ़ में संगठन कार्य को मजबूत करने और हजारों कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शक के रूप में उनकी भूमिका लंबे समय तक याद की जाएगी।
|| भारत माता की जय ||
