समाज को राष्ट्रकथा की आवश्यकता जुगराज धार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सतना नगर का शताब्दी वर्ष पथ संचलन
अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम

सतना, 26 अक्टूबर 2025।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सतना नगर द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य पथ संचलन एवं बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन रविवार को सी.एम.ए. स्कूल, रीवा रोड परिसर में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अनुराग जैन, प्राध्यापक एवं सर्जन हेड, मेडिकल कॉलेज रहे। मंच पर नगर संघचालक कृष्ण कुमार गुप्ता एवं जुगराज धर की उपस्थिति रही।

मुख्य वक्ता डॉ. अनुराग जैन ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सदैव सेवा और अनुशासन को सर्वोपरि रखा है। बाढ़, भूकंप और कोरोना जैसी आपदाओं के समय संघ के स्वयंसेवकों ने जिस निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा की, वह अनुकरणीय है। संघ की पहचान उसका समयपालन, अनुशासन और समर्पण है।” उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष पर शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता जुगराज धर, विश्व हिंदू परिषद क्षेत्र संपर्क प्रमुख, ने अपने उद्बोधन में कहा —
आज समय की पुकार है कि राष्ट्रकथा फिर से जनमंचों पर गूँजे। महाराणा प्रताप, छत्रसाल, पृथ्वीराज चौहान, चाणक्य, चंद्रगुप्त और सावरकर जैसे महापुरुषों की गाथाएँ युवा पीढ़ी के हृदय में सदैव जलती रहें — यही राष्ट्रजागरण की जड़ है।”

उन्होंने बताया कि संघ की स्थापना डॉ. हेडगेवार जी ने राष्ट्र की स्वतंत्रता और संगठन के उद्देश्य से की थी। संघ अपने प्रारंभ से ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा रहा। डॉ. हेडगेवार स्वयं कई बार जेल गए और एक वर्ष का कठोर श्रम दंड भी भोगा। मात्र 16 स्वयंसेवकों से प्रारंभ हुआ यह संगठन आज देश के प्रत्येक क्षेत्र में कार्य कर रहा है।”

संघ की अडिग निष्ठा और सेवा का विस्तार
जुगराज धर ने कहा कि संघ पर आरंभ से ही षड्यंत्र किए गए — गांधी हत्या का आरोप हो या 1975 का आपातकाल — किंतु संघ के स्वयंसेवक कभी विचलित नहीं हुए। संघ की आत्मा तप, त्याग और निष्ठा है, जिसने हर चुनौती के बाद उसे और सशक्त किया।

उन्होंने कहा कि आज संघ पाँच प्रमुख परिवर्तनों पर कार्य कर रहा है —

  1. सामाजिक समरसता – समाज में जाति, भाषा, प्रांत से ऊपर उठकर एकात्मता का भाव।
  2. कुटुंब प्रबोधन – परिवार को राष्ट्र निर्माण की मूल इकाई बनाना।
  3. स्वदेशी भाव – आर्थिक स्वावलंबन से सांस्कृतिक स्वतंत्रता की रक्षा।
  4. पर्यावरण संरक्षण – प्रकृति को माता मानकर उसकी रक्षा करना।
  5. नागरिक कर्तव्य – कानून, समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाना।

भव्य पथ संचलन में स्वयंसेवकों का अनुशासित प्रदर्शन
नगर के तीनों उपनगरों से अनुशासनबद्ध पथ संचलन हुआ।

  • गंगा (श्रीराम उपनगर एवं शिव उपनगर) – शासकीय इंदिरा महाविद्यालय से प्रारंभ होकर सी.एम.ए. स्कूल तक पहुँचा।
  • यमुना (श्रीकृष्ण उपनगर एवं कामतानाथ उपनगर) – व्यंकटेश मंदिर से प्रारंभ होकर सर्किट हाउस मार्ग से गुज़रा।
  • सरस्वती (महावीर उपनगर एवं वैष्णो उपनगर) – श्री शाइन पैलेस से प्रारंभ होकर जीवन ज्योति मार्ग से सी.एम.ए. स्कूल पहुँचा।

संचलन मार्ग पर मातृशक्तियों ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया और भारत माता की जय” तथा जय श्रीराम” के घोषों से वातावरण गूँज उठा।

40 बस्तियों के स्वयंसेवक गणवेश में अनुशासनपूर्वक कदमताल करते हुए आगे बढ़े। राष्ट्रभक्ति का जोश, गणवेश की मर्यादा और एकात्मता का संदेश — यह दृश्य सतना नगर के लिए एक प्रेरक क्षण बन गया।

कार्यक्रम का समापन भारत माता की जय के घोष और वंदे मातरम् के स्वर के साथ हुआ।
संघ की यह यात्रा व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र के उत्थान की दिशा में सतत अग्रसर है।

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