शहडोल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में संपूर्ण हिंदू समाज के सहयोग से घरौला बस्ती में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संघ के महाकौशल प्रांत के पर्यावरण प्रमुख रामकृष्ण जी उपस्थित रहे। संत एवं सामाजिक प्रतिनिधि के रूप में ज्योतिषाचार्य सुशील शास्त्री और समाज सेविका राखी शर्मा ने भी सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण से हुआ। कन्या पूजन तथा हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सम्मेलन में सकल हिंदू समाज के गणमान्य नागरिकों, मातृशक्ति और युवाओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति देखने को मिली।
मुख्य वक्ता रामकृष्ण जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि विभिन्न जातियों के अलग-अलग कार्यक्रम तो होते रहे हैं, लेकिन हिंदू समाज का एक छत के नीचे एकत्र होना विरल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वयं को हिंदू मानने और उस पर गर्व करने की भावना कहीं न कहीं क्षीण हुई है।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि आखिर 1925 में ऐसा क्या हुआ कि परम पूज्य डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना करनी पड़ी। इसका मूल उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना था। रामकृष्ण जी ने कहा कि देश के इतिहास में ऐसे महापुरुष हुए जिन्होंने गर्व के साथ अपने हिंदू होने का उद्घोष किया।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में उन्होंने निर्भीकता से कहा- “मैं हिंदू हूं।” वहीं डॉ. हेडगेवार ने भी स्पष्ट शब्दों में भारत को हिंदू राष्ट्र बताते हुए समाज को एकता का संदेश दिया। इन महापुरुषों ने अपना संपूर्ण जीवन हिंदू समाज के संगठन और जागरण के लिए समर्पित किया।
रामकृष्ण जी ने आगे कहा कि आज हिंदू समाज विभिन्न देवी-देवताओं और महापुरुषों के आधार पर विभाजित दिखाई देता है, जबकि सभी का उद्देश्य समाज का कल्याण ही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हिंदुओं में वीरता और ज्ञान की कभी कमी नहीं रही, कमी केवल एकता, समरसता और सद्भाव की रही है। समय की आवश्यकता है कि हम जाति और समुदाय से ऊपर उठकर अपनी साझा पहचान को मजबूत करें।
कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों के लिए विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।

