संघ अर्थात त्याग, तपस्या, अनुशासन और सामूहिकता है : ब्रजकांत जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाकौशल प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग (विशेष) का शुभारंभ

सिवनी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाकौशल प्रांत द्वारा आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (विशेष) का शुभारंभ 9 मई को सिवनी में उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में हुआ। इस वर्ग में महाकौशल प्रांत के 10 विभागों एवं 34 जिलों से आए 168 स्वयंसेवक सहभागिता कर रहे हैं। इनमें अधिवक्ता, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रोफेसर, सेवानिवृत्त कर्मचारी, व्यवसायी तथा कृषक जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े स्वयंसेवक शामिल हैं, जिनकी आयु 41 से 65 वर्ष के मध्य है।

वर्ग के शुभारंभ सत्र में वर्ग के सर्वाधिकारी परमिंदरजीत सिंह बिंद्रा, वर्ग कार्यवाह रमेश साहू एवं महाकौशल प्रांत के प्रांत प्रचारक ब्रजकांत जी ने भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर तथा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर प्रांत प्रचारक ब्रजकांत जी ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह वर्ग अनेक दृष्टियों से ऐतिहासिक है, क्योंकि यह संघ के शताब्दी वर्ष में आयोजित हो रहा है। साथ ही इस वर्ष वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष तथा गुरु तेगबहादुर जी के शहादत पर्व के 350 वर्ष भी पूर्ण हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय ऐसे राष्ट्र की कल्पना की थी, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति शिक्षित, संस्कारित एवं राष्ट्रहित के लिए समर्पित हो।

उन्होंने कहा कि संघ कोई राजनीतिक अथवा केवल सांस्कृतिक संगठन नहीं, बल्कि एक वैचारिक संगठन है, जहाँ विचारों के माध्यम से व्यक्ति निर्माण का कार्य किया जाता है। संघ शिक्षा वर्ग की परंपरा वर्ष 1929 में संघ संस्थापक परम पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा अधिकारी शिक्षा वर्ग (ओटीसी) के रूप में प्रारंभ की गई थी, जिसे वर्ष 1950 में परम पूजनीय गुरुजी ने “संघ शिक्षा वर्ग” नाम दिया।

ब्रजकांत जी ने कहा कि “संघ अर्थात त्याग, तपस्या, अनुशासन, सामूहिकता, समयपालन, प्रमाणिकता और सामाजिक समरसता है। जिस व्यक्ति के जीवन में अनुशासन और समयपालन आता है, उसकी प्रगति सुनिश्चित होती है।”

वर्ग की दिनचर्या अत्यंत अनुशासित एवं प्रेरणादायी है। प्रतिदिन प्रातः 4 बजे जागरण के साथ वर्ग का प्रारंभ होता है। इसके पश्चात स्नान, ध्यान एवं संघ स्थान पर शारीरिक प्रशिक्षण के अंतर्गत व्यायाम, योग, दंड संचालन तथा नियुद्ध का अभ्यास कराया जा रहा है। वहीं दिन में बौद्धिक चर्चा, गीत एवं प्रार्थना अभ्यास के माध्यम से स्वयंसेवकों के वैचारिक एवं सांस्कृतिक विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

यह वर्ग 10 मई से प्रारंभ होकर 24 मई 2026 तक संचालित होगा। वर्ग के सफल संचालन में सिवनी नगर की मातृशक्ति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रतिदिन प्रातः एवं सायंकाल स्वयंसेवकों के भोजन निर्माण में नगर की मातृशक्ति सेवा भाव से सहयोग प्रदान कर रही है। साथ ही प्रतिदिन सायंकाल संघ स्थान पर नगर के गणमान्य नागरिकों, बुद्धिजीवियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के बंधु-भगिनियों के लिए वर्ग दर्शन की विशेष व्यवस्था भी की गई है।

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