संघ के 100 वर्षों की यात्रा ने समाज को संगठित करने की दिशा दी : विनोद दिनेश्वर

वारासिवनी (बालाघाट)।
वीरांगना रानी अवंतीबाई स्टेडियम में सकल हिंदू समाज के तत्वावधान में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक विधि से पंच पूजा के साथ हुआ, जिसमें पृथ्वी माता, गौमाता, तुलसी माता का पूजन, हवन एवं कन्या पूजन संपन्न हुआ। सम्मेलन में राष्ट्रीय, सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना का सशक्त संदेश दिया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में नागरिकों की सहभागिता रही।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय संत स्वामी जगतगुरु राघव देवाचार्य जी महाराज ने अपने प्रबोधन में समाज को संगठित रखने, सम्राट भाव और एकता के महत्व को समझाते हुए सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार प्रमुख श्रीमान विनोद दिनेश्वर ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए समाज को उन्नत, सशक्त और संगठित बनाने में संघ के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने समाज को जागरूक रहते हुए संगठन की शक्ति को समझने और एकजुट रहने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा की भारत को खण्ड-खण्ड में विभाजित करने का एक भयावह षड्यंत्र चल रहा। कभी धर्म के आधार पर, कभी मत, पंथ, संप्रदाय के आधार पर तो कभी जातियों के आधार पर। ऐसे खतरनाक षड्यंत्रों से आज हिन्दू समाज को बचने की आवश्यकता है। हिन्दू एकत्व के बल पर ही हम भारत को विश्व गुरु के स्थान पर पुनः प्रतिष्ठित कर सकते हैं।

कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की बौद्धिक प्रमुख श्रीमती प्रतिमा बिसेन ने पंच परिवर्तन विषय पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका को विस्तार से बताया। उन्होंने इतिहास में मातृशक्ति के योगदान का स्मरण कराते हुए वर्तमान समय में भी उनके दायित्वों को रेखांकित किया।

ओजस्वी वीर रस कवि सुमित ओरछा ने काव्यात्मक शैली में राष्ट्र को मजबूत बनाने में प्रत्येक नागरिक की भूमिका को प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया, जिससे श्रोतागण भावविभोर हो उठे।

सम्मेलन के उपरांत राम मंदिर वारासिवनी से भव्य रैली एवं शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी, माता शबरी, अहिल्या, भारत माता, माँ सरस्वती सहित छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज, महाराणा प्रताप, राजा भोज, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, रानी अवंतीबाई, रानी काशीबाई, रानी अहिल्याबाई, बिरसा मुंडा, डॉ. भीमराव अंबेडकर, संत रविदास आदि महापुरुषों की आकर्षक झांकियां शामिल रहीं।

कार्यक्रम में संत-महात्माओं, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, मातृशक्ति तथा क्षेत्र के सभी समाजों के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

सम्मेलन के दौरान मातृशक्ति के सम्मान एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक स्वरूप लगभग 3000 रुद्राक्षों का वितरण किया गया। यह वितरण विशेष रूप से मातृशक्तियों को समर्पित रहा, जिससे नारी शक्ति के प्रति सम्मान, संस्कार और सनातन परंपरा से जुड़ाव का भाव सशक्त रूप से प्रकट हुआ। समापन पर लगभग 8000 लोगों का समरसता भोज आयोजित किया गया, जिसने सामाजिक एकता और समरसता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया।

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