रामनामी समाज को रानी दुर्गावती न्यास के द्वारा सम्मान

जबलपुर । छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सामाजिक-धार्मिक परंपरा से जुड़े रामनामी समाज के प्रतिनिधियों का केशव कुटी में आत्मीय आगमन हुआ। इस अवसर पर रामनामी बंधुओं को रानी दुर्गावती न्यास द्वारा श्रीफल अर्पित कर सम्मानित किया गया तथा श्रीराम स्मृति-चिन्ह भेंट किया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने रामनामी समाज की राष्ट्रनिष्ठा, अनुशासित जीवनशैली और सामाजिक समरसता के मूल्यों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक समाज में विभिन्न प्रकार के लोग होते हैं, किंतु समाज की पहचान सदैव अच्छे आचरण, सेवा और सद्भाव के मार्ग पर चलने वाले व्यक्तियों से होती है। रामनामी समाज ने अपने विचारों और आचरण से समाज को सदैव सकारात्मक संदेश दिया है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रामनामी समुदाय की अध्यक्ष गुरुमाता सेतबाई रामनामी सहित समाज के वरिष्ठजन मंचासीन रहे। रामनामी समाज के प्रतिनिधियों ने अपने उद्बोधन में समुदाय की उत्पत्ति, विचारधारा और कार्यपद्धति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रामनामी समाज ने अपने शरीर पर ‘राम-राम’ अंकित कर शरीर को ही मंदिर का स्वरूप दिया है और यह संदेश दिया है कि राम घट-घट में विद्यमान हैं तथा किसी को उनसे अलग नहीं किया जा सकता।

वक्ताओं ने कहा कि रामनामी समाज शाकाहार, नशामुक्त जीवन, सत्य, अहिंसा और मन-वचन-कर्म से सभी प्राणियों के प्रति समभाव को अपना मूल सिद्धांत मानता है। समाज में जाति, धर्म या लिंग के आधार पर भेदभाव का कोई स्थान नहीं है। भजन, रामायण पाठ और सत्संग के माध्यम से समाज नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का संदेश देता आ रहा है।

कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ संरक्षक मनहरण रामनामी, महासचिव श्री भूराराम रामनामी, आचार्य श्री रामभगत रामनामी, माता श्री गीता बाई रामनामी, माता श्री शांति बाई रामनामी, वरिष्ठ सेवक राम सिंह रामनामी, श्री कुंजविहारी रामनामी, श्री तिहारुराम रामनामी तथा 90 वर्ष की आयु में भी सक्रिय आपू राम रामनामी की विशेष उपस्थिति रही।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक जुगराजधर, प्रांत संघचालक प्रदीप दुबे, प्रांत प्रचारक ब्रजकांत, शरद अग्रवाल सहित अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने रामनामी समाज की परंपराओं, राष्ट्रभाव और सामाजिक योगदान की सराहना की तथा समाज और संगठन के बीच परस्पर सहयोग को समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थितजनों ने रामनामी समाज की परंपरा, अनुशासन और आध्यात्मिक जीवन-पद्धति को सामाजिक समरसता का प्रेरक उदाहरण बताया।

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