टीकमगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संघ ने समाज की सज्जन शक्ति को साथ लेकर विश्व के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करने वाला संगठित, समर्थ और समृद्ध भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इस संकल्प की पूर्ति हेतु समाज के प्रतिष्ठित एवं प्रभावशाली व्यक्तित्वों से संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से कुंडेश्वर रोड स्थित कृषि महाविद्यालय के सभागार में प्रमुख जनगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में जे. नंदकुमार जी (अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह) उपस्थित रहे। वहीं, मुख्य अतिथि के रूप में माननीय जिला संघचालक श्री शिरीष बिहारी मिश्रा मंचासीन रहे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विगत 100 वर्षों से सुसंस्कृत, अनुशासित एवं राष्ट्र के प्रति समर्पित स्वयंसेवकों का निर्माण करते हुए समाज को संगठित करने का कार्य निरंतर कर रहा है। इसी दिशा में संघ का लक्ष्य भारत को परम वैभव की ओर अग्रसर करना है।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता जे. नंदकुमार जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष को केवल एक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में समझने की आवश्यकता है। हमें इसे संघ की दृष्टि से एक आत्ममंथन और कार्यदिशा निर्धारण के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यकर्ताओं का दायित्व है कि वे संघ के विचारों और कार्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाएं। साथ ही यह भी विचार करना आवश्यक है कि हमें आगे किस प्रकार से कार्य करना है और अभी कितना कार्य शेष है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ कोई सामान्य सांस्कृतिक संगठन नहीं है। डॉक्टर हेडगेवार द्वारा स्थापित यह संगठन एक स्पष्ट लक्ष्य और सुसंगठित कार्यपद्धति के कारण निरंतर प्रगति कर रहा है। आज भी संघ निरंतर विस्तार की ओर अग्रसर है और उसके विचार पूरे विश्व में पहुंच रहे हैं
मुख्य वक्ता जे. नंदकुमार जी ने अपने उद्बोधन में बताया कि स्वामी विवेकानंद ने इच्छा शक्ति के प्रकटिकरण और व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष जोर दिया था। उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से स्थापित संघ के पीछे स्वामी विवेकानंद सहित अनेक महान आदर्शों की प्रेरणा रही है।
श्री नंदकुमार जी ने स्वामी विवेकानंद के विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र का आधार होता है। राष्ट्र को शक्तिशाली बनाने के लिए त्याग और सेवा दोनों अनिवार्य हैं, जो भारत के सनातन जीवन मूल्यों के आधारभूत तत्व हैं। त्याग, तपस्या और समर्पण के माध्यम से ही एक सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण संभव है।
उन्होंने आगे कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों को आत्मसात कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा प्रारंभ की।
उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए व्यक्ति निर्माण अत्यंत आवश्यक है। हमें इस भाव के साथ जीवन जीना चाहिए कि यह देश हमें सब कुछ देता है, इसलिए हमारा भी कर्तव्य है कि हम देश को कुछ लौटाएं।
अंत में उन्होंने प्रेरणादायी शब्दों में कहा—
“देश हमें देता है सब कुछ, हम भी कुछ देना सीखें।”
सारगर्भित उद्बोधन में श्री जे. नंदकुमार जी ने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र रहा है, है और रहेगा। उद्बोधन के पश्चात उन्होंने उपस्थित सुधीजन की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया और उनके प्रश्नों के उत्तर विस्तारपूर्वक दिए।
