लवकुशनगर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में लवकुशनगर स्थित सृजन महाविद्यालय में प्रमुख जनगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार उपस्थित रहे। उनके साथ विभाग संचालक नर्मदा प्रसाद गुप्ता भी मंच पर मौजूद रहे।
मुख्य वक्ता जे. नंदकुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि “संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सभी समाजों का संगठन है।” उन्होंने संघ की स्थापना के संघर्षपूर्ण इतिहास और समाजसेवा के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे संघ आज शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि “स्वयं के लिए जीना मृत्यु के समान है, जबकि राष्ट्र के लिए समर्पित होना ही सच्चा जीवन है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संघ निरंतर समाज में संस्कार, समरसता और राष्ट्रभावना को सुदृढ़ करने का कार्य कर रहा है।
जे. नंदकुमार ने कहा कि कई संगठन समय के साथ समाप्त हो जाते हैं, लेकिन संघ अपने निस्वार्थ और समर्पित कार्यकर्ताओं के बल पर आज भी विश्व का सबसे बड़ा समाजसेवी संगठन बनकर कार्य कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ में जाति, वर्ग या ऊंच-नीच का कोई भेदभाव नहीं है, यहां सभी स्वयंसेवक समान भाव से कार्य करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान और “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर सैकड़ों प्रमुख जन, मातृशक्ति के साथ विभाग सह संपर्क प्रमुख नारायण सिंह, मनोज चतुर्वेदी, विभाग प्रचारक शिवेंद्र और जिला प्रचारक अरविंद सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

