शक्ति, सम्मान और संबल: महिलाओं के लिए भारत सरकार की अनुपम पहल

– एड. पूजा रजक

महिला सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए हम अक्सर उसके मूल भाव से भटक जाते हैं। सशक्तिकरण का अर्थ है—महिलाओं की सामाजिक, आध्यात्मिक और आर्थिक शक्ति को इस रूप में बढ़ाना कि वे आत्मनिर्भर बनें, निर्णय लेने में सक्षम हों और अपने जीवन में स्थायी परिवर्तन ला सकें।
भारतीय नारी प्राचीन काल से ही उन्नत गुणों की खान रही है। उसमें सूर्य जैसा तेज, चंद्रमा जैसी शीतलता, सागर जैसी गंभीरता और पर्वत जैसी अडिगता समाहित होती है। वह करुणा, दया, त्याग और प्रेम की अमूल्य निधि है। जयशंकर प्रसाद ने भी नारी को श्रद्धा का रूप माना है।
वैदिक युग में स्त्रियों को शिक्षा, युद्ध और कला में समान अवसर प्राप्त थे। वे वेदाध्ययन करती थीं और यज्ञ बिना उनके अधूरे माने जाते थे। आज का भारत भी उसी परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है। शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता में महिलाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘उज्ज्वला योजना’ जैसी योजनाओं से महिलाओं को नई उड़ान दी है। ये योजनाएं आत्मनिर्भरता के साथ उन्हें नए भारत की अगुवाई का हौसला भी दे रही हैं।

  • स्वच्छ भारत मिशन (2014) : शौचालय निर्माण के माध्यम से महिलाओं को अपमान, अस्वस्थता और असुरक्षा से मुक्ति मिली। अब 93% महिलाओं को संक्रमण का डर नहीं है।
  • सुकन्या समृद्धि योजना (2015): बेटियों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शुरू हुई यह योजना अब लैंगिक समानता और सुरक्षित भविष्य का आधार बन चुकी है।
  • बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (2015): बालिका लिंगानुपात सुधारने और शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने हेतु यह योजना कारगर रही है। लिंगानुपात और माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
  • उज्ज्वला योजना (2016): महिलाओं को धुएं से राहत देने हेतु 10.33 करोड़ मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए। यह महिलाओं के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए क्रांतिकारी कदम रहा।
  • महिला ई-हाट (2016): ऑनलाइन व्यापार और प्रशिक्षण हेतु डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म।
  • महिला पुलिस स्वयंसेवक योजना (2016): दहेज, घरेलू हिंसा और उत्पीड़न के मामलों की निगरानी।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (2017): गर्भवती महिलाओं को पोषण और स्वास्थ्य देखभाल हेतु 5000 रुपये तीन किस्तों में प्रदान किए जाते हैं।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (2017): गर्भवती महिलाओं को पोषण व देखभाल के लिए 5000 रुपये तीन किश्तों में दिए जाते हैं।
  • मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना (2017): आय सीमा वाले परिवारों की कन्याओं के विवाह हेतु ₹51,000 की सहायता।
  • मिशन शक्ति अभियान (2020): महिला सशक्तिकरण हेतु यूपी में चलाया गया राज्यव्यापी अभियान; 9 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच।
  • स्वामित्व योजना (2021): ‘घरौनी’ दस्तावेज़ में महिलाओं के नाम को प्राथमिकता।
  • शबरी संकल्प अभियान (2022): 3-5 वर्ष के कुपोषित बच्चों को पोषण आहार, बालिका विवाह सहायता ₹75,000।
  • महिला सम्मान बचत प्रमाण पत्र (2023): 2 लाख तक कर-मुक्त निवेश का अवसर, 2 वर्ष की अवधि के लिए।
  • सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान (2024): महिलाओं व बच्चों के पोषण कार्यों हेतु पंचायतों को सम्मान।
  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम: महिलाओं को राजनीति में भागीदारी दिलाने हेतु लोकसभा व विधानसभा की 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं।
  • सक्षम आंगनवाड़ी मिशन: देशभर में 2 लाख आंगनबाड़ियों के उन्नयन का लक्ष्य, जिससे 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पोषण व पूर्व शिक्षा में बेहतर सुविधा मिले।
  • वन स्टॉप सेंटर व महिला हेल्पलाइन (181): घरेलू हिंसा पीड़ित महिलाओं को एक छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी, परामर्श और आपात सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • महिलाओं को समान अधिकार:
    ट्रिपल तलाक निषेध (2019): मुस्लिम महिलाओं को कानूनी सुरक्षा।
    विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष (2021): शिक्षा और करियर का अवसर।
    मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह (2017): कार्यरत महिलाओं को सुविधा।
    धारा 370 हटना (2019): जम्मू-कश्मीर की महिलाओं को समान संपत्ति अधिकार।
  • स्टैंड अप इंडिया योजना: SC/ST और महिला उद्यमियों को 10 लाख से 1 करोड़ तक ऋण।
  • सुकन्या समृद्धि योजना: बालिकाओं के लिए बचत योजना; परिपक्वता पर कर-मुक्त राशि।

आज की भारतीय नारी सशक्तिकरण को नई परिभाषा दे रही है। वह धरती की मजबूती से लेकर अंतरिक्ष की ऊँचाइयों तक अपनी अमिट छाप छोड़ रही है। इसका जीवंत उदाहरण हैं प्रोफेसर जी. माधवी लता, जिन्होंने 17 वर्षों की अथक मेहनत से विश्व के सबसे ऊंचे चिनाब ब्रिज का डिजाइन, योजना और निर्माण कर भारत को वैश्विक पहचान दिलाई।

मात्र तकनीक ही नहीं, अंतरिक्ष विज्ञान में भी नारी शक्ति अग्रणी है। चंद्रयान-2 मिशन में पहली बार प्रोजेक्ट डायरेक्टर और मिशन डायरेक्टर दोनों महिलाएं थीं। मिशन मंगल की सफलता में भी महिलाओं की निर्णायक भूमिका रही।

रक्षा क्षेत्र में भी महिलाएं पीछे नहीं रहीं। तानिया शेरगिल पहली महिला बनीं जिन्हें आर्मी परेड की कमान सौंपी गई, वहीं भावना कस्तूरी ने गणतंत्र दिवस परेड का नेतृत्व कर इतिहास रच दिया। आज जलसेना, वायुसेना, नौसेना, आरपीएफ और बीएसएफ में महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर सेवाएं दे रही हैं।

यह परिवर्तन दर्शाता है कि आधुनिक भारतीय नारी केवल शक्ति की प्रतीक नहीं, बल्कि नवभारत की निर्माता भी बन चुकी है।

(लेखिका मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में अधिवक्ता हैं)

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