जबलपुर। वीरता, शौर्य और राष्ट्रभक्ति की अद्भुत मिसाल बनी संस्कारधानी जबलपुर, जब क्रीड़ा भारती महाकौशल प्रांत के संयोजन में महाराष्ट्र शिक्षण मंडल, रोटरी क्लब साउथ और अनेक सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से पावनखिंड दौड़ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके वीर सेनापति बाजी प्रभु देशपांडे की गौरवगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बना, बल्कि जबलपुर के इतिहास में भी एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ गया।
यह दौड़ उसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में आयोजित की गई जब 12 जुलाई 1660 को शिवाजी महाराज के 600 मावलों ने पन्हाला से विशालगढ़ तक अंधेरी रात में 65 किलोमीटर का कठिन सफर तय किया। इस दौरान बाजी प्रभु देशपांडे ने अपने 300 मराठा वीरों के साथ सिद्दी मसूद की विशाल सेना को पावनखिंड में रोका और अपने प्राणों की आहुति देकर महाराज को सुरक्षित पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया।

सुबह वंदे मातरम चौक सिविक सेंटर से प्रारंभ हुई यह दौड़ मदन महल स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा तक पहुंची। लगभग 1200 बच्चों ने देशभक्ति और अदम्य उत्साह के साथ इस दौड़ में भाग लिया। विभिन्न विद्यालयों और क्रीड़ा केंद्रों के छात्रों ने बाजी प्रभु की वीरगाथा को जीवंत कर दिया।
मुख्य वक्ता डॉ. जामदार ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा –
“पावनखिंड वह पवित्र भूमि है जहां बाजी प्रभु ने अंतिम सांस तक युद्ध करते हुए हिंदवी स्वराज्य की रक्षा की। उनका बलिदान इतिहास में अमर है। यह आयोजन युवाओं में वही जोश और राष्ट्रभक्ति जगाने का प्रयास है।”
उन्होंने शिवाजी महाराज के शौर्य का वर्णन करते हुए भुषण का प्रसिद्ध काव्य उद्धृत किया:
“इन्द्र जिमि जंभ पर, रावन सदंभ पर,
सेर शिवराज हैं मलिच्छ बंस पर।
पौन बारिबाह पर, संभु रतिनाह पर,
ज्यौं सहस्रबाह पर राम-द्विजराज हैं॥
दावा द्रुम दंड पर, चीता मृगझुंड पर,
‘भूषन वितुंड पर, जैसे मृगराज हैं।
तेज तम अंस पर, कान्ह जिमि कंस पर,
त्यौं मलिच्छ बंस पर, सेर शिवराज हैं॥”
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख विनोद दिनेश्वर, विधायक डॉ. अभिलाष पांडे, क्रीड़ा भारती के नियामक मंडल सदस्य भीष्म सिंह राजपूत, क्षेत्र संयोजक अनंत डिके, प्रांत कोष प्रमुख प्रकाश विस्पुते, अजय शुक्ला, प्रमोद पाठक, मनोज सिंह, डॉ. प्रकाश धीरावाणी, संजय सिंह, विशाल बन्ने एवं मातृशक्ति की प्रीति ठाकुर सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
आयोजन का समापन शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए और गगनभेदी “जय भवानी-जय शिवाजी” के नारों के साथ हुआ। इस दौड़ ने बच्चों और नागरिकों में इतिहास की चेतना, बलिदान का भाव और राष्ट्रप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित कर दी।
यह आयोजन न केवल महाकौशल में बल्कि पूरे प्रदेश में संस्कारधानी की पहचान को और प्रखर करता है। पावनखिंड दौड़ ने यह साबित कर दिया कि जबलपुर न केवल शिक्षा और संस्कृति का केंद्र है, बल्कि वीरता और राष्ट्रभक्ति के क्षेत्र में भी उसकी भूमिका अप्रतिम है।

