राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव सम्पन्न
सतना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में श्री शिव उपनगर स्थित साई बस्ती में विजयादशमी उत्सव का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा विभाग, सतना के सहायक संचालक श्रीमान गिरीश अग्निहोत्री उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन के शताब्दी वर्ष के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होना गौरव का क्षण है। उन्होंने संघ की 1925 से प्रारंभ हुई यात्रा को राष्ट्र के सेवा, संस्कार, शिक्षा एवं संस्कृति की रक्षा के लिए वटवृक्ष स्वरूप बताया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महाकौशल प्रांत के प्रांत प्रचारक श्री बृजकान्त जी रहे। उन्होंने विजयादशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह उत्सव अंतः और बाह्य शत्रुओं पर विजय का प्रतीक है। व्यक्ति को काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर जैसे आंतरिक दोषों पर विजय प्राप्त करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा व्यक्ति को अहं से वयं की ओर ले जाने का माध्यम है। 100 वर्षों से संघ की अखण्ड और नित्य साधना समाज जागरण का कार्य कर रही है।”
प्रांत प्रचारक ने स्पष्ट किया कि आज समाज की प्रमुख समस्या का कारण राष्ट्रबोध, समाजबोध, मित्रबोध और शत्रुबोध का अभाव है। ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीवंत राष्ट्रपुरुष है, जिसकी चेतना और संस्कृति को जीवित रखना हम सबका कर्तव्य है।
संघ की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 16 स्वयंसेवकों के साथ विजयादशमी के दिन संगठन का शुभारंभ किया था। डॉ. हेडगेवार ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रकार्य के लिए समर्पित किया। उन्होंने माना कि हिंदू समाज को संगठित किए बिना भारत माता का परम वैभव संभव नहीं।
कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक ने शाखा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नित्य शाखा व्यक्ति के विचार बदलती है और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। शाखा प्रत्येक स्वयंसेवक में दायित्वबोध उत्पन्न करती है और समाज को सशक्त बनाने का माध्यम है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, नागरिक एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

