अषाढ़ मास की ‘गुरुपूर्णिमा’ की तिथि हमारी सांस्कृतिक चेतना और विरासत का जीवंत शाश्वत प्रवाह है। जो राष्ट्र की सभ्यता एवं संस्कृति के सर्वोच्च और […]
विशेष
नवरात्र का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तादात्म्य तथा आसुरी प्रवृत्तियों का शोधन
ऐतिहासिक और पौराणिक संदर्भों में आदि शक्ति का इतिहास सनातन है, जहाँ उन्हें परम चेतना, ब्रह्मांड की मूल निर्माता, दृष्टा और संहारक शक्ति के स्वरुप […]
महाकौशल प्रान्त में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अरुणोदय
संघ शताब्दी वर्ष आलेख शृंखला चतुर्थ दिवस महाकौशल प्रान्त भारत का हृदयांचल है। भौगोलिक और भूवैज्ञानिक दृष्टि से महाकौशल प्रान्त सर्वाधिक प्राचीनतम गोंडवाना लैंड भूसंहति […]
कृतज्ञ किसानों का महापर्व – पोला
“आत्मवत् सर्वभूतेषु”, “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “माता भूमि पुत्रोऽहम पृथिव्याः” जैसे उच्च आदर्शों से अनुप्राणित भारतीय संस्कृति ने न केवल मानव मूल्यों का सम्मान किया है, […]
अखंड भारत के साधक पेशवा बाजीराव
– डॉ. प्रवीण दाताराम गुगनानी चौदह अगस्त, 1947 अखंड भारत दिवस और अट्ठारह अगस्त वर्ष 1700, पेशवा बाजीराव प्रथम का जन्मदिवस; ये दोनों प्रसंग एक […]
अंग्रेजों का ‘न्यायपूर्ण’ शासन’..? / १
ज्ञात इतिहास में भारत पर आक्रांताओं के रूप में आने वालों में शक, हूण, कुषाण, मुसलमान, डच, पोर्तुगीज, फ्रेंच, अंग्रेज़ आदि प्रमुख हैं. इन में […]
“भारत में गजवा-ए-हिंद का विस्तार, इसलिए हर हिंदू बने वीर दुर्गादास राठौर”
“दुरगो आसकरण रो, नित उठ बागा जाये,अमल औरंग रो उतारे, दिल्ली धड़का खाए।” वर्तमान परिस्थितियों में बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद न केवल बांग्लादेश वरन् […]
भाई-बहिन की विजय और सामाजिक समरसता का प्रतीक है, कजलियों का लोक पर्व
– डॉ. आनंद सिंह राणा भारत में पर्व युगों से चली आ रही सांस्कृतिक परम्पराओं, प्रथाओं, मान्यताओं, विश्वासों, आदर्शों, नैतिक, धार्मिक तथा सामाजिक मूल्यों का […]
रक्षाबंधन – रिश्तों की डोर, विश्वास का बंधन
“धागों में बंधी है प्रेम की गहराई, विश्वास की मजबूती और रक्षा का संकल्प” श्रावण मास की शुक्ल पूर्णिमा… सावन की मस्ती में भीगा आसमान, […]
मूल निवासी दिवस समाज को विघटित करने का षड्यंत्र
मूल निवासी दिवस समाज को विघटित करने का षड्यंत्र – प्रोफेसर मनीषा शर्मा 9 अगस्त को विश्व मूल निवासी दिवस मनाया जाता है। मूल निवासियों […]
