युवा शक्ति से सांस्कृतिक पुनर्जागरण की ओर भारत : डॉ. पूर्णेन्दु सक्सैना

शहडोल में संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य युवा सम्मेलन, 1600 से अधिक युवाओं की सहभागिता

शहडोल।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत रविवार, 11 जनवरी को शहडोल जिले में एक भव्य युवा सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शहडोल नगर के पांडव नगर स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में संपन्न हुआ। यह युवा सम्मेलन संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित सात प्रमुख कार्यक्रमों में से एक रहा।

युवा सम्मेलन में शहडोल जिले के सभी नगरों, बस्तियों, मंडलों एवं ग्रामों से लगभग 1600 युवाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. पूर्णेन्दु सक्सैना (मध्य क्षेत्र संघचालक) उपस्थित रहे, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में शहडोल नगर स्थित टाइम पब्लिक स्कूल के संचालक जितेंद्र शुक्ला मंचासीन रहे।

अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में डॉ. पूर्णेन्दु सक्सैना ने स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े अनेक प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी शासन के कठिन दौर में, जब देश की संस्कृति और सभ्यता को दबाने के प्रयास हो रहे थे, तब भी स्वामी विवेकानंद ने सकारात्मक चिंतन नहीं छोड़ा। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि समय के साथ सनातन धर्म तथा भारतीय सभ्यता पुनः अपने उत्कर्ष की ओर बढ़ेगी। उनका यह संदेश युवाओं के लिए आज भी मार्गदर्शक है।

मुख्य अतिथि जितेंद्र शुक्ला ने स्वामी विवेकानंद की शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन यात्रा का उल्लेख करते हुए उनके व्यक्तित्व, चरित्र और राष्ट्र के प्रति समर्पण को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा निर्धारित पंच परिवर्तन विषय पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से समाज परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान पंजीकृत युवाओं को विभिन्न टोलियों में विभाजित कर खेलकूद एवं शारीरिक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे युवाओं में अनुशासन, समन्वय और उत्साह का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागियों के लिए भोजन व्यवस्था की गई।

महाकौशल प्रांत शहडोल जिला प्रचार विभाग द्वारा कार्यक्रम स्थल पर विश्व संवाद केंद्र, साहित्य बिक्री केंद्र तथा महापुरुषों के जीवन पर आधारित साहित्य एवं छायाचित्रों की प्रदर्शनी के स्टॉल भी लगाए गए, जहां से युवाओं ने बड़ी संख्या में राष्ट्रप्रेरक साहित्य का क्रय किया।

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