संघ शताब्दी वर्ष का महापर्व
युवा शक्ति ही समाज देश राष्ट्र की सनातन संस्कृती सनातन धर्म उन्नति की मजबूत बुनियाद है
भारत के इतिहास में कुछ ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाये घटित हुई। जिनका खयाल जेहन में आता है। तब खूनी स्फुरण होने लगता है। भारत मे स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ मंदिर के विध्वंस आज कर हजार वर्ष पूर्व जिसमे कई हजार भक्तों पुजारियों का समूहिक नर संहार हुआ था। मान्यता हैं।
सौराष्ट्र जनपद में सोमनाथ जोतिर्लिंग की स्थापना भगवान चंद्रदेव ने की थी कही यह भी उल्लेख मिलता है कि भगवान परशुराम ने की थी। यह मंदिर विश्व मे अत्याधिक आकर्षण का केंद्र था और जस का तस है। विधर्मियो आतातायीओ आक्रांताओं के लूट का केंद्र भी यह मंदिर रहा। मध्य काल का समय लूट अगणित सनातनियो के संहार का समय रहा। महमूद गजनवी की लूट इतनी भीभत्स और क्रूरतम थी। जिसे सुनकर पढ़कर हृदय विदीर्ण होता है। दसवीं शताब्दी की यह घटना लूट भर नही थी। जो वहा थे उनकी हत्या कर दी गई। उसकी फ़ौज ने महिलाओं के साथ अमानवीय कृत्य किये और बची हुई नारियों का अपहरण कर गुलामो के बाजार में बेच दिया। सोमनाथ मंदिर का विध्वंस पहला और अंतिम नही था। लेकिन यह विध्वंस क्रूरता की पराकाष्ठा युक्त था। इसलिए यह भुलाए नही भूलता है। आज सहस्त्राब्दी पूरी हुई। सम्पूर्ण सनातन धर्मियों ने इसे मर्मांतक पीड़ा युक्तता से याद किया।
आज धर्म के चितेरों ने 11 जनवरी 2026 मांघ कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हिन्दू जागरण की नई दिशा नई ऊर्जा चेतना पटल पर करने हेतु सनातन जाग्रति सनातन धर्म एवम सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आवाह्न पर पन्ना जिला मुख्यालय के नजर बाग खेल मैदान में यह आयोजन आयोजित किया जा रहा है। सभी सनातनियो और आज की युवा तरुणाई जो भविष्य के आधार है। उनकी आभा मे ज्ञान का अक्षय भंडार है। केवल प्रकटीकरण की महती आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को लेकर विशाल युवा कुम्भ का आयोजन आयोजित है। जिले के सभी प्रबुद्धजनों नारी शक्ति अबाल समाज के उदबोधको का सादर आमंत्रण किया गया है।
यह तिथि कौतूहल का विषय है। भगवान कृष्ण की तीर्थ भूमि जो द्वापर युग के धर्म के अनुवर्तक थे। उनका जन्म भी भाद्र पद की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को हुआ था। पौराणिक कथाएँ बताती है। कि धर्म पर अधर्म का गहन अंधकार गहरी काली रात की तरह ढकने की हरकत करता है। विधर्मियो की कुत्सित चालो की घनघोर बारिश होती है। तब सोलह कला युक्त धर्म के रक्षक कृष्ण का जन्म होता है।
कृष्ण का जन्म विपरीत परिस्थितियों में होता है। शिशु रूप से लेकर बचपन और युवा अवस्था तक द्वापर युग को युग धर्म की श्रेणी में रचना कर दी युग के अनुकूल धर्म का पालन सेवन अनुरक्षण की नई दिशा दे दी। यदि सम्पूर्ण लिखे गए पुराण आख्यान मीमांसाये इस ओर इंगित करती है। देश राष्ट्र समाज सामाजिक रूप में किये गए महानतम कार्य युवावस्था में किये गए। भगवान राम ने भी अपनी युवावस्था में सनातन धर्म के अन्वेषक हमारे आर्ष ऋषियो के संताप को हरा और पापाचारियो आक्रांताओं का पराभव किया। भगवान राम ने पिता के दिये गए जंगल की सल्तनत को सम्हालने राम पथ इसी धरती के सारंग में सुतीक्ष्ण के आश्रम में ऋषि मुनियों की अस्थियों के ढेर को देख द्रवित होकर धर्म विध्वंसको का समूल नाश युवा शक्ति का प्रदर्शन कर राम राज्य की सत्ता स्थापित की युगों युगों के इतिहास के प्राणवान पृष्ठों में जितने भी अद्वतीय कार्य सम्पादित हुए उनमें युवा उर्वरा सोच थी। त्रेता द्वापर युगों से लेकर वर्तमान युग की अनन्त दीर्घ यात्रा में सबसे बड़ा क्रुरो का लक्ष्य रहा भारत की सनातन एकता सम्प्रभुता सनातन के अमिट प्रतीक चिन्हों का विध्वंस करना।
इतिहास गवाह है कि भारत मे हमेशा अवतरित होने वाली परम सत्ताओं के प्रवर्तन कारो ने अपनी युवा अवस्था मे आने वाले युगो की सन्तति को अपने कर्तव्य की गाथाएं गढ़ी है।
बुंदेला लड़ाके जो मलेक्षो के खिलाफ अनवरत युद्ध लड़ते हुए। यहा की सँस्कृति को बचाया। उनमें बड़े गर्व से नाम लिया जाता है। जिनका जन्म विन्ध्य की उपत्तिकाओ की मोर पहाड़ियों में जन्म हुआ शैशव सिंहो के बीच बीता अपनी परिपक्वता युद्धों में साबित की वह नाम आज अविनाशी वीरता के लिए इतिहास बद्ध हुआ। बुंदेलखंड नर वीर छत्रसाल जिनकी राजधानी पन्ना थी। पहला शासक है। जिन्होंने बचपन से लेकर 84 वर्ष की अवस्था तक विधर्मियो के पैर नही जमने दिये सनातन रक्षक छत्रसाल का जीवन खास कर युवा वीरता युवाओ का आदर्श होना चाहिए।
अनवरत मुगल शासन के बाद हमने अपनी सँस्कृति पर बिदेसियो के प्रहार सहे उनके मंसूबो पर चोट करने वाले युवा अगणित क्रन्तिकारी थे जिनका इतिहास आज यशो गान कर्ता चला आ रहा है। इतिहास इस बात का गवाही है। अपने अस्तित्व अपने वजूद की रक्षार्थ भारत के धर्म वीरो स्वंतंत्रता सेनानियों में सर्वाधिक बलिदान देश हित में भारत माता की अस्मिता बचाने में युवा पीढ़ी ही अग्र गण्य रही। जिनकी हम पुण्य तिथियां मना कर इति श्री करना युवा नर वीरो का आभूषण नही होना चाहिए वही आदर्श जीवन मे उतार कर भारत के अभूत पूर्व गौरव भारत की विपुल धनराशि की चर्चा होती चली आई है। उसको नया आयाम देने का आधार युवा वर्ग की विलक्षण प्रतिभा है। नई चेतना में नई ऊर्जा भरना देश हित है।
आज हम उन राष्ट्र हित चिंतकों जिनकी सूची बहुत बड़ी है। आजाद भारत के बाद भी बिधर्मियो ने आक्रांताओं ने कोई कोर कसर नही लगाई तब 1889 में युग ऋषि का जन्म हुआ जिन्होंने 1925 में छोटी सी बैठक नागपुर में कर एक सनातन रक्षीय विचारधारा का बीज रोपा वह कोई और नही डॉ बलिराम केसव हेडगेवार जिनका रक्त का एक एक कण जीवन का एक एक क्षण राष्ट्र को समर्पित रहा। आज वही विशाल वृक्ष रास्ट्रीय स्वम सेवक संघ दुनिया का सबसे अनुशासित सङ्गठन उनके कृतित्व की आज संघ शताब्दी वर्ष का महा उत्सव मनाया जा रहा है।
भारत मे विश्वव की अड़तालीस संस्कृतियां आई। लेकिन सब की सब काल के गाल में समाहित हो गई। आज विश्व के क्षेतिज पर अकड के साथ सीना तान कर खड़ी है। वह है व्यास मान्य वेद मान्य एकमेव हिदू सनातन संस्कृति ! व्यक्ति से समाज निर्माण और राष्ट्र उन्नति का लक्ष्य और हिंदुत्ववादी विचारधारा सामाजिक एकता को स्थायित्व देना संघ की वैचारिक सोच है।
किसी भी राष्ट्र की मूल संस्कृतिक चेतना होती है वही आत्म गौरव का बोध होता है। जो उस समाज के व्योहार अचार विचार और मनोभावों का जीवंत दर्पण है। स्वतंत्रता व्यक्ति का उत्तम मूल्य है। जिसके बिना न तो अपने स्वरूप को समझ सकता और न ही उसका प्रकटीकरण कर सकता। भारत बर्ष की दासता मुक्ति के अनवरत संघर्ष चलते रहे। लेकिन उस स्वतंत्रता का स्वरूप क्या होगा क्या यह स्वतंत्रता राजनैतिक ही होगी। क्या इतना ही गौरव शाली राष्ट्र के लिए पर्याप्त है। इसके साथ मानसिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता की अवश्यकता है। सम्मनीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिकित्सक राष्ट्र चिंतक केशव बलिराम हेडगेवार जी ने महसूस की थी। जब तक समाज संगठित चरित्रवान सांस्कृतिक रूप से जागरूक नही होगा। तब तक स्वतंत्र भारत कमजोर ही रहेगा। इसलिए व्यक्ति निर्माण से समाज निर्माण इसके माध्यम से राष्ट्र उन्नति ही स्वतंत्रता का वास्तविक स्वरूप परिलक्षित होगा। यही विचारधारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि बनी भारतवर्ष में बिना सत्ता बिना चुनाव बिना सरकारी संरक्षण समाज मे ग़हरी पैठ बनाई है। तो वह है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नागपुर मे 1925 की छोटी बैठक आज 2025 में अपनी शताब्दी पूर्ण कर महा उत्सव मना रहा है।
आइए हम हम प्रगति शील धर्म युक्त युवा शक्ति के साथ सनातन धर्म प्रधान होकर एक सक्षम नेतृत्वकर्ता विश्व पटल पर उभरे यह सो वर्ष का इतिहास नही बल्कि भारतीय समाज के आत्म बोध पुनर्जागरण और राष्ट्र निर्माण की लंबी यात्रा है।
