संघ शताब्दी वर्ष में रीवा बना युवा चेतना का केंद्र
अनुशासन, राष्ट्रभाव और सेवा संकल्प से गूंजा भव्य युवा सम्मेलन
रीवा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर रीवा जिले में आयोजित भव्य युवा सम्मेलन अत्यंत अनुशासित, गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन जिले के विभिन्न मंडलों एवं ग्रामों से आए सैकड़ों युवा स्वयंसेवकों की ऊर्जस्वित सहभागिता का साक्षी बना, जहाँ राष्ट्रभक्ति, एकात्मता और संगठनात्मक संस्कारों का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
सम्मेलन में अखिल भारतीय सह-संपर्क प्रमुख श्री रमेश पप्पा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री संतोष मिश्रा जी थे। मंच पर उपस्थित वरिष्ठ पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऊँचाई प्रदान की।
मुख्य वक्ता श्री रमेश पप्पा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में युवाओं से संघ द्वारा प्रतिपादित पंच परिवर्तन को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन एवं विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाशक्ति राष्ट्र के सर्वांगीण विकास की निर्णायक शक्ति है। विवेक, अनुशासन, सेवा-भाव और प्रखर राष्ट्रभाव के माध्यम से समाज में सकारात्मक एवं स्थायी परिवर्तन संभव है।
उन्होंने कहा कि आज का युवा यदि संगठन, समरसता और कर्तव्यबोध के साथ आगे बढ़े, तो भारत विश्व को दिशा देने वाली शक्ति बन सकता है। सम्मेलन के दौरान युवाओं का अनुशासित आचरण, सामूहिक एकात्मता और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
इस अवसर पर महाकौशल प्रांत एवं रीवा विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि यह युवा सम्मेलन न केवल एक कार्यक्रम था, बल्कि राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और संगठनात्मक संस्कारों के विस्तार की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हुआ।

