भारत में लोकतंत्र केवल चुनावों की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह प्रतिनिधित्व की गुणवत्ता का भी प्रश्न जब हम जनजातीय समान-डॉ. दीपमाला रावत विशेषकर जनजातीय […]
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धर्मांतरण और अनुसूचित जाति का दर्जा: कानून, समाज और न्याय का जटिल संवाद
भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता उसका संविधान है, एक ऐसा जीवंत दस्तावेज, जो समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर टिका है। लेकिन […]
